करौं. सच्ची लगन, दृढ़ इच्छा शक्ति व मन संकल्प हो तो प्रतिकूल जमीन में भी खेती कर फसल गेहूं, सरसों, मटर व चना आदि फसलों को उपजाया जा सकता है. करौं ग्राम में भी करीब चार एकड़ बंजर व बेकार पड़े जमीन पर युवा किसान लोचन मंडल व उनके परिवार के लोग फसल उगाकर हरियाली पैदाकर इतिहास रचते हुये खेती-बाड़ी से मोहभंग लोगों के बीच उत्साह उत्पन्न कर रहा है. कम पूंजी, कम संसाधन और सीमित सिंचाई के बावजूद भी सरसों, चना, मटर छीमी आदि इस मिश्रित खेती की इस अनूठी पहल को देखकर हर आने-जाने वाले राहगीर पुलकित होते और उन्हें खेती करने की ओर प्रेरित हो रहा है. लोचन ने कहा कि सरकार से सरसों बीज मिला था. जमीन उनके गांव के लोगों का है. बटाई में जमीन लेकर सरसों व गेहूं लगाया है. उन्होंने कहा कि गांव लोग अपने मवेशी भी छोड़ देते है, जिससे फसल चर जाता है और उन्हें हानि भी होती है. मुखिया व जनप्रतिनिधि से इस बारे बातें की पर कोई परिणाम नहीं निकला. तब थक हारकर बांस का बेड़ा लगाया. पूरे दिन खेतों में ही रहना पड़ता है. कहा कि सामूहिक रूप से सभी लोग अपने जानवरों चराये तो परेशानी दूर हो सकती है. उन्होंने सरकार से कृषि कार्य को बढ़ावा देने के पूंजी व संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है. ताकि लघु किसान व मजदूर मेहनत के बल पर फसलों की बारह महीने खेती कर आर्थिक समृद्धि को बढ़ा सकते है. साथ ही धीरे-धीरे आत्मनिर्भर की कदम बढ़ता जाये. ————– बंजर भूमि पर किसान खेती कर आर्थिक रूप से हो रहे समृद्ध
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