पालोजोरी : पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के 1501वें जन्मदिन के अवसर पर ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का त्योहार पालोजोरी प्रखंड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अकीदत, अदब और उत्साह के साथ मनाया गया. इस मौके पर क्षेत्र में भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने शामिल होकर अपनी अकीदत का इजहार किया.
नारों और नातिया कलाम से गूंजा इलाका
जुलूस की शुरुआत पारंपरिक और मजहबी रीति-रिवाजों के साथ हुई. युवा, बच्चे और बुजुर्ग हाथों में इस्लामिक परचम और शांति के प्रतीक झंडे थामे नजर आए. पूरे रास्ते धार्मिक नारे गूंजते रहे और डीजे व लाउडस्पीकर पर पैगंबर साहब की शान में नातिया कलाम पढ़े गए. अकीदतमंदों का कारवां उत्साह के साथ आगे बढ़ता रहा.
बांधडीह मदरसा से निकला पारंपरिक जुलूस
पारंपरिक जुलूस बांधडीह मदरसा समेत विभिन्न ग्रामीण इलाकों, कस्बों और टोलों से निर्धारित कमेटियों के नेतृत्व में निकाला गया. जैसे-जैसे जुलूस आगे बढ़ा, रास्ते में लोग इसमें जुड़ते गए और देखते ही देखते यह विशाल जनसमूह में बदल गया. अनुशासन के साथ विभिन्न मुख्य मार्गों से गुजरता हुआ जुलूस पालोजोरी मुख्य बाजार पहुंचा, जहां स्थानीय लोगों ने इसका स्वागत किया. अकीदतमंदों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था भी की गई थी.
पैगंबर की शिक्षाओं पर डाला प्रकाश
जुलूस के पालोजोरी नूरी जामा मस्जिद पहुंचने पर समाज के प्रबुद्ध लोगों और उलेमाओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर साहब ने पूरी दुनिया को अमन, शांति, इंसानियत, दया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया. उनके बताए रास्ते पर चलना ही सच्ची इबादत है.
अमन-चैन और सांप्रदायिक सौहार्द की मांगी दुआ
कार्यक्रम के समापन पर देश और क्षेत्र में सुख-समृद्धि, तरक्की, शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से दुआ मांगी गई. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन सतर्क रहा. वहीं, स्थानीय अंजुमन कमेटियों और वालंटियर्स ने जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में भूमिका निभाई.
