संताल परगना की ‘क्लास’ में दुमका-जामताड़ा आगे, पाकुड़ फिसड्डी, राज्य में पूर्वी सिंहभूम नंबर-वन, गुमला सबसे पीछे

झारखंड की 15वीं जिला शिक्षा प्रदर्शन रिपोर्ट जारी. पूर्वी सिंहभूम पहले स्थान पर, जबकि गुमला सबसे निचले पायदान पर है. जानें अपने जिले का हाल.

शिक्षा समीक्षा. 15वीं जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट

जुलाई के प्रदर्शन के आधार पर तैयार अगस्त की रिपोर्ट में साहिबगंज ने 11 पायदान की छलांग लगायी, देवघर नौ स्थान लुढ़का, स्मार्ट क्लास के इस्तेमाल में अब भी बड़ा अंतर

संजीत मंडल, देवघर झारखंड की सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति की 15वीं जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट में जिलों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर सामने आया है. जुलाई 2026 के प्रदर्शन के आधार पर तैयार अगस्त की समग्र रैंकिंग में पूर्वी सिंहभूम 76.38 प्रतिशत के साथ पहले और गुमला 49.11 प्रतिशत के साथ 24वें स्थान पर है. 24 गुणवत्ता संकेतकों पर तैयार रिपोर्ट का सबसे गंभीर पक्ष 19 जिलों के 132 सरकारी स्कूलों में शून्य नामांकन है. वहीं छात्र उपस्थिति बढ़कर 77.12 प्रतिशत हुई, जबकि शिक्षक उपस्थिति घटकर 84.71 प्रतिशत रह गयी. आइसीटी लैब का इस्तेमाल 94.71 प्रतिशत स्कूलों में हुआ, लेकिन स्मार्ट क्लास/इ-कंटेंट का उपयोग केवल 24.98 प्रतिशत में दर्ज हुआ.

पूर्वी सिंहभूम की बादशाहत, गुमला सबसे पीछे

पूर्वी सिंहभूम 76.38, लोहरदगा 71.92 और कोडरमा 69.96 प्रतिशत के साथ क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. रामगढ़ 69.14 और सिमडेगा 68.06 प्रतिशत के साथ चौथे-पांचवें स्थान पर हैं. पश्चिमी सिंहभूम 53.13, पाकुड़ 54.81 और गुमला 49.11 प्रतिशत के साथ क्रमश: 23वें, 22वें और 24वें स्थान पर हैं. शीर्ष और निचले जिले के प्रदर्शन में करीब 27 प्रतिशत अंक का अंतर है.

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रैंकिंग में साहिबगंज का जोरदार सुधार, देवघर को झटका

साहिबगंज ने 11 पायदान की छलांग लगाकर 12वां स्थान पाया. लातेहार 10 और गोड्डा सात रैंक ऊपर आये. देवघर नौ रैंक गिरकर 18वें, जबकि खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम आठ-आठ रैंक नीचे गये. दुमका 62.37 प्रतिशत के साथ आठवें, जामताड़ा 61.24 के साथ नौवें, साहिबगंज 59.54 के साथ 12वें, गोड्डा 57.40 के साथ 17वें, देवघर 57.01 के साथ 18वें और पाकुड़ 54.81 प्रतिशत के साथ 22वें स्थान पर है. साहिबगंज के सुधार में स्कूल मॉनिटरिंग, प्रोजेक्ट रेल और स्वास्थ्य जांच प्रमुख रहे. गोड्डा में शिक्षक उपस्थिति और सिलेबस कवरेज सुधरा, जबकि देवघर में छात्र उपस्थिति और पीएम-पोषण संकेतक चिंता का विषय हैं. पाकुड़ में छात्र उपस्थिति 70.34, स्वास्थ्य जांच 6.6 और पीएम-पोषण कवरेज 67.7 प्रतिशत रहा.

स्कूलों में नामांकन की तस्वीर चिंताजनक

गुमला में 32, रांची में 28, हजारीबाग में 16, पलामू में 13 और बोकारो में 10 स्कूल शून्य नामांकन वाले हैं. पांच जिलों में ही ऐसे करीब 75 प्रतिशत स्कूल हैं. दुमका, गोड्डा, देवघर और पाकुड़ में भी एक-दो स्कूल इस सूची में हैं.

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बच्चों की उपस्थिति बढ़ी, पीएम-पोषण कवरेज में गिरावट

जुलाई में छात्र उपस्थिति 77.12 प्रतिशत रही, जो जून से करीब चार प्रतिशत अधिक है. खूंटी 83.84 प्रतिशत के साथ आगे और पाकुड़ 70.34 प्रतिशत के साथ पीछे रहा. शिक्षक उपस्थिति 84.71 प्रतिशत रही. कोडरमा 91.11 प्रतिशत के साथ आगे और जामताड़ा 75.70 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे रहा. पीएम-पोषण कवरेज मई के 75.2 से जून में 73.5 प्रतिशत हुआ. कक्षा छह से आठ में यह 69.4 प्रतिशत रहा.

आइसीटी लैब का इस्तेमाल बेहतर, स्मार्ट क्लास में सुस्ती

आइसीटी लैब इस्तेमाल 94.71 प्रतिशत स्कूलों में हुआ. जामताड़ा 99.38 प्रतिशत के साथ आगे रहा. इसके मुकाबले स्मार्ट क्लास/ई-कंटेंट का उपयोग सिर्फ 24.98 प्रतिशत स्कूलों में हुआ. पीएम श्री स्कूलों में नामांकन वृद्धि दर भी पिछले वर्ष के 6.53 प्रतिशत से घटकर 2.72 प्रतिशत रह गयी.

शिक्षा सचिव ने कहा- रैंकिंग नहीं, कमियों को दूर करना लक्ष्य

शिक्षा सचिव उमा शंकर सिंह ने उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि समीक्षा को महज रैंकिंग तक सीमित न रखें. कमजोर संकेतकों की स्कूल, प्रखंड और क्लस्टर स्तर पर समीक्षा कर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें. शून्य नामांकन वाले स्कूलों की स्कूल-वार समीक्षा, छात्र-शिक्षक उपस्थिति में सुधार, पीएम-पोषण कवरेज बढ़ाने और डिजिटल संसाधनों के नियमित शैक्षणिक उपयोग पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है.


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By Prabhat khabar news desk

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