आस्था के आगे सब कष्ट का कोई महत्व नही,पश्चिम बंगाल से बाबाधाम दंडवत कर पहुंच रहा है दर्शन को कुणाल

पश्चिम बंगाल के कुणाल बाध्यकर लोगों के दुखों को दूर करने की कामना के साथ दंडवत करते हुए बाबाधाम पहुंच रहे हैं। उनकी अटूट आस्था की यह प्रेरणादायक कहानी पढ़ें।

देवघर: खुद के लिए धर्म-कर्म करने वालों से इतर पश्चिम बंगाल का एक युवा दूसरों के दुख-दर्द दूर करने की कामना लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबाधाम पहुंचने को आतुर है। पश्चिम बंगाल के कैनरा गांव निवासी 20 वर्षीय सनातनी युवक कुणाल बाध्यकर 11 जुलाई को अपने घर से दंडवत करते हुए बाबाधाम के लिए निकले हैं.

कुणाल ने अपनी यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताया कि हर धर्म के लोग अपने कर्मों के कारण किसी न किसी रूप में दुख और तकलीफ झेल रहे हैं. उनकी कामना है कि बाबा भोलेनाथ सभी लोगों के दुख-दर्द को दूर करें और उन पर अपनी कृपा बरसाएं. इसी प्रार्थना के साथ वह दंडवत यात्रा करते हुए बाबाधाम पहुंच रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आस्था के आगे उन्हें किसी तरह का कष्ट महसूस नहीं होता. उनके मन में बस एक ही तमन्ना है कि जल्द से जल्द बाबा भोलेनाथ के कामनालिंग पर जलार्पण कर सकें. सोमवार को कुणाल सारवा-देवघर मुख्य पथ पर घाटघर के समीप दंडवत करते हुए आगे बढ़ रहे थे.

एक सवाल के जवाब में कुणाल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि बाबा भोलेनाथ उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर कष्ट और दुख-तकलीफ में रहने वाले लोगों पर अपनी कृपा बरसाएंगे. इंसानों के दुखों को कम करने की कामना से की जा रही उनकी यह यात्रा पूरी तरह बाबा भोलेनाथ को समर्पित है.

कुणाल ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने कांवड़ यात्रा की थी। इस बार वह दंडवत यात्रा कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगले वर्ष भी बाबा की इच्छा और कृपा रही तो वह बाबाधाम की यात्रा पर आएंगे। इस कठिन दंडवत यात्रा में उनके पिता सुकुमार बाध्यकर भी उनके साथ चल रहे हैं.


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By मिथिलेश सिन्हा

2001 से प्रभात खबर से जुड़ कर जनहित से जुड़ी पत्रकारिता कर रहे हैं. विकास, लोगों की समस्या, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बेहतर कवरेज करते रहे हैं.

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