लैब से निकल हर गांव तक पहुंचेगा AI: IndiaAI Mission की कमान संभाल रहे देवघर के IAS ने बताया अपना विजन

IAS Nand Kumaram: देवघर के रहने वाले 2008 बैच के आईएएस अधिकारी नंद कुमारम आज भारत के 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन' का नेतृत्व कर रहे हैं. NeGD के सीईओ के रूप में वे ₹10,371 करोड़ के IndiaAI मिशन के जरिये तकनीक को आम आदमी के जीवन से जोड़ रहे हैं. आईआईटी धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग और यूपीएससी में 8वीं रैंक हासिल करने वाले नंद कुमारम का लक्ष्य डिजिटल डिवाइड को खत्म कर सरकारी सेवाओं को हर नागरिक के मोबाइल तक पहुंचाना है.

देवघर, (डॉक्टर आलोक सिंह): बाबा बैद्यनाथ की पावन धरती देवघर से निकलकर देश की डिजिटल नीतियों के केंद्र में पहुंचे आइएएस अधिकारी नंद कुमारम आज भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्रांति का अहम चेहरा बन चुके हैं. वर्ष 2008 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी नंद कुमारम वर्तमान में नेशनल ई गर्वनेंस डिविजन ( एनइजीडी) के प्रेसिडेंट और सीइओ हैं. यह संस्था केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल शासन की प्रमुख योजनाओं का संचालन करती है. वे डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन तथा माईगोव से भी जुड़े हैं और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर काम कर रहे हैं.

नंद कुमारम ने बताया क्या है IndiaAI Mission ?

एआइ के बारे में नंद कुमारम से हुई बातचीत में उन्होंने इसे आम लोगों के लिए उपयोगी बनाने की बात कही. उन्होंने ने कहा कि जब तक एआइ आम आदमी के जीवन को आसान नहीं बनायेगा, उसकी सार्थकता अधूरी रहेगी. बताया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी IndiaAI Mission के तहत अब प्राथमिकता ऐसे एआई आधारित एप्लीकेशन विकसित करने की है, जो सीधे लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े हों. उद्देश्य है कि नागरिकों को उनके क्षेत्र से संबंधित अस्पताल, स्कूल, सरकारी योजनाएं, प्रमाण पत्र या अन्य सार्वजनिक सेवाओं की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर, एक क्लिक में उपलब्ध हो.

सरकार प्रमुख आईटी कंपनियों से ले रही परामर्श : नंद कुमारम

नंद कुमारम के अनुसार, इस प्रणाली में स्थानीय स्तर की सूचनाओं को भी एकीकृत किया जायेगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग समान रूप से लाभान्वित हो सकें. विशेष रूप से अशिक्षित या डिजिटल रूप से कम सक्षम नागरिकों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मॉड्यूल विकसित किये जा रहे हैं, जो सरकारी योजनाओं के आवेदन पत्र भरने, दस्तावेजों की जानकारी देने और प्रक्रिया समझाने में सहायता करेंगे. इस पहल को मजबूत बनाने के लिए सरकार प्रमुख आईटी कंपनियों से भी परामर्श कर रही है. उन्होंने बताया कि टीसीएस सहित कई तकनीकी कंपनियों से बातचीत जारी है, ताकि एक सुरक्षित, स्केलेबल और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा तैयार किया जा सके. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि DigiLocker जैसे प्लेटफॉर्म को एआई प्रणाली से एकीकृत कर दिया जाये, तो लाखों उपयोगकर्ताओं तक तेजी से पहुंच संभव है. इससे दस्तावेज सत्यापन, आवेदन प्रक्रिया और सेवा वितरण अधिक सरल और पारदर्शी बन सकेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को प्रयोगशाला से निकालकर गांव-कस्बों तक ले जाना ही सरकार का लक्ष्य है.

क्या है IndiaAI Mission का उद्देश्य

मार्च 2024 में केंद्र सरकार ने IndiaAI Mission को मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत ₹10,371 करोड़ है. इस मिशन का उद्देश्य देश में एआई आधारित मजबूत और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है. इसके तहत उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन, भारतीय भाषाओं में एआई मॉडल, स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता, युवाओं के लिए प्रशिक्षण और सुरक्षित-नैतिक एआई ढांचा विकसित करने की योजना है.

अपने बुलू पर माता-पिता को गर्व है

देवघर के शिवपुरी महल्ले के अदयानंद झा के पुत्र हैं नंद कुमारम. पिता अदयानंद झा व मां मीना देवी कहते हैं कि बाबा भोले की कृपा से बुलू (नंद कुमारम के घर का नाम) को सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि देवघर के संत फ्रांसिस स्कूल से प्लस टू करने के बाद दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में नंद का नामांकन कराया. कुछ दिन बाद ही नंद दिल्ली से देवघर लौट आया. उसने कहा कि देवघर में ही रहकर तैयारी करूंगा. इसी दौरान उसका चयन आईआईटी (आइएसएम) धनबाद में हो गया. वहां से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की. इस दौरान उसके गुरु पांडेय सर ने यूपीएससी परीक्षा में सफल होने की प्रेरणा दी. अमेरिका की एक कंपनी में कुछ माह नौकरी करने के बाद नंद ने एक दिन फोन कर कहा कि मुझे अब यह नौकरी नहीं करनी है. मैं देवघर लौट रहा हैं. इसके बाद उसने 2008 में यूपीएससी की परीक्षा में आठवां रैंक लाकर आइएएस बने. पिता अदयानंद कहते हैं कि नंद कुमारम आज भी जमीन पर सोते हैं. नंद की पत्नी छवि भारद्वाज भी आइएएस हैं. पोता अणर्व झा आठवीं का छात्र है. नंद कुमारम के बचपन के मित्र पीयूष जायसवाल कहते हैं कि पैदल या साइकिल से चलना ही उन्हें पसंद है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >