प्रतिनिधि, सारठ : एक तरफ बेटे को खोने का गम और दूसरी तरफ सरकारी दफ्तरों की लंबी प्रक्रिया. सारठ प्रखंड के दलदली गांव निवासी बद्री नापित इन दिनों इसी दोहरी परेशानी से जूझ रहे हैं. बेटे गोविंदा नापित की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद मिलने वाली अनुग्रह राशि के लिए वह अंचल से लेकर जिला स्तर तक की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, लेकिन करीब चार साल बाद भी राशि का भुगतान नहीं हो सका है.
हादसे में घायल बेटे ने रिम्स में तोड़ा था दम
बद्री नापित ने बताया कि उनके बेटे गोविंदा नापित 18 मार्च 2022 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गये थे. इलाज के दौरान 21 मार्च 2022 को रिम्स रांची में उनकी मौत हो गयी. रिम्स ओपी की ओर से फर्द बयान लेकर सारठ थाना भेजा गया था, लेकिन लंबे समय तक यूडी केस दर्ज नहीं किया गया.
डीजीपी के निर्देश के बाद दो साल में दर्ज हुआ यूडी केस
यूडी केस दर्ज नहीं होने पर पंसस एम. सिन्हा ने डीजीपी झारखंड को पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज कराने का अनुरोध किया था. शिकायत को संज्ञान में लेते हुए डीजीपी ने देवघर एसपी को मामले की जांच कर प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया.
इसके बाद देवघर एसपी ने सारठ थाना प्रभारी को ज्ञापांक 37, दिनांक 15 जनवरी 2024 के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया. डीजीपी के निर्देश के बाद जनवरी 2024 में गोविंदा की मौत के मामले में सारठ थाना में यूडी केस दर्ज किया गया.
अभिलेख भेजे, फिर भी नहीं मिली भुगतान की मंजूरी
यूडी केस दर्ज होने के बाद मृतक के आश्रित पिता बद्री नापित ने सारठ सीओ को आपदा के तहत सड़क दुर्घटना में बेटे की मौत पर अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए आवेदन दिया. उनका कहना है कि सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया गया था.
जांच के बाद अंचल कार्यालय ने अभिलेख संख्या 04/2024-25 की मूल संचिका के साथ अनुग्रह राशि का भुगतान करने के लिए भूमि सुधार उप समाहर्ता को कार्यालय पत्रांक 989/रा, दिनांक 24 दिसंबर 2024 को भेज दिया. इसके बावजूद अब तक भुगतान की स्वीकृति नहीं मिल सकी है.
तीन माह में मिलनी थी राशि, 20 माह से काट रहे चक्कर
बद्री नापित का कहना है कि आपदा के तहत प्रभावित परिवार के आश्रितों को एक से तीन माह के अंदर अनुग्रह राशि के भुगतान का प्रावधान है. इसके बावजूद उनका मामला सरकारी प्रक्रिया में अटका हुआ है.
उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद परिवार पहले से ही परेशानी में है. इसके बाद अनुग्रह राशि के लिए भी लगातार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है.
सीओ बोले- स्वीकृति के लिए भेजा है अभिलेख
मामले को लेकर अंचल अधिकारी कृष्ण चंद्र सिंह मुंडा ने कहा कि दिसंबर 2024 में ही अंचल कार्यालय से मूल अभिलेख की स्वीकृति के लिए डीसीएलआर, मधुपुर को भेजा गया है. अब तक स्वीकृति नहीं होने को लेकर जिला को पत्र भेजा जाएगा.
विधायक भी डीसी को लिख चुके हैं पत्र
स्थानीय विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह ने भी पांच जून को प्रखंड क्षेत्र के आपदा प्रभावित परिवारों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान राशि का भुगतान कराने को लेकर डीसी को पत्र भेजा है. इसके बावजूद 20 माह बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं होना परिजनों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है.
