देवघर से संजीत मंडल की रिपोर्ट
Deoghar News: झारखंड के देवघर जिले में शनिवार को प्रशासनिक स्तर पर अहम बदलाव देखने को मिला. जिले के 47वें उपायुक्त के रूप में शशि प्रकाश सिंह ने निवर्तमान डीसी नमन प्रियेश लकड़ा से विधिवत पदभार ग्रहण किया. इस दौरान समाहरणालय परिसर में कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे और नए डीसी का स्वागत किया गया.
समन्वय और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में डीसी शशि प्रकाश सिंह ने अपने प्रशासनिक विजन को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए समन्वय और पारदर्शिता को आधार बनाया जाएगा. आम जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा.
जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ लक्ष्य
नए डीसी ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा और जो लाभुक अब तक वंचित हैं, उन्हें भी योजनाओं से जोड़ा जाएगा. इसके लिए जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाया जाएगा.
जमीनी स्तर पर होगी सख्त निगरानी
शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि योजनाओं की सही क्रियान्विति के लिए नियमित समीक्षा और निगरानी जरूरी है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर योजना की प्रगति पर नजर रखी जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही लोगों तक पहुंचे.
सकारात्मक और जवाबदेह प्रशासन का भरोसा
नए डीसी ने यह भी भरोसा दिलाया कि देवघर में एक सकारात्मक और जवाबदेह प्रशासनिक माहौल तैयार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना और हल किया जाएगा. पारदर्शी कार्यशैली के जरिए प्रशासन में लोगों का विश्वास मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा.
इसे भी पढ़ें: बदल गए लोहरदगा, चतरा और साहेबगंज के डीसी, पदभार किया ग्रहण
देवघर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
शशि प्रकाश सिंह के पदभार ग्रहण करने के साथ ही जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. प्रशासनिक स्तर पर नई ऊर्जा के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में काम तेज होने की संभावना है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि उनके नेतृत्व में देवघर विकास के नए आयाम कैसे स्थापित करता है.
इसे भी पढ़ें: देवघर में आज भी 1857 के गदर की याद दिलाती है खामोश विरासत, तीन वतनपरस्तों को दी गई थी फांसी
