Deoghar: देवघर जिले में मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की स्थिति फंड की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण गंभीर होती जा रही है. पिछले दो वर्षों से योजना में पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हो पाया है, जिसके कारण पूरे जिले में करीब 35 करोड़ रुपये बकाया हो गया है. इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अनुसूचित जाति वर्ग के लाभुकों के लिए 20 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 15 करोड़ रुपये की मांग लंबित है. स्थिति यह है कि पिछले एक महीने से योजना का पोर्टल भी नियमित रूप से नहीं खुल रहा है.
600 से अधिक आवेदन लंबित
तकनीकी खराबी के कारण नये आवेदन पूरी तरह बंद हैं, जिससे योजना लगभग ठप हो चुकी है. पहले से जमा करीब 600 से अधिक आवेदनों पर भी अब तक ऋण स्वीकृति नहीं हो पायी है. समय पर ऋण नहीं मिलने से बेरोजगार युवक-युवतियों की स्वरोजगार योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं. हर दिन बड़ी संख्या में आवेदक कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन फंड के अभाव में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है. दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी खाली हाथ वापस जाना पड़ रहा है.
25 लाख रुपये तक बिना गारंटी के लोन का प्रावधान
पिछले साल नवंबर-दिसंबर में आयोजित ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में भी इस योजना के तहत आवेदन नहीं लिये गये थे. इससे बेरोजगारों में और अधिक निराशा बढ़ी है. मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत किराना स्टोर, पोल्ट्री फार्म, स्टेशनरी दुकान, चार पहिया वाहन सहित अन्य छोटे व्यवसायों के लिए 50 हजार से 25 लाख रुपये तक का बिना गारंटी ऋण देने का प्रावधान है. हालांकि, मौजूदा हालात में योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
ये भी पढ़ें…
रामनवमी के जुलूस में धनबाद की बेटियों का दिखेगा हुनर, अखाड़ों में बहा रहीं पसीना
चतरा में होमगार्ड बहाली डेट में बदलाव, 1 अप्रैल से शुरू होगा फिजिकल और रिटेन एग्जाम
