मधुपुर : शहर समेत ग्रामीण अंचलों में मुसलिम भाइयों ने निहायत ही अदब व एहतराम के साथ रमजान के पहले जुमे की नमाज सभी मस्जिदों में अता की. इमामों ने रमजानुल मोबारक की फजीहलतों को लोगों को समझाया कि रोजा रखने से फितरा, जकात निकालने व अपनी जमात नमाज, पंचगाना अता किये जाने की बात लोगों व बच्चों को समझाया.
कहा कि रमजानुल मोबारक साल के सबसे अफजल महीना है. इस महीने में अल्लाह गुनाहगारों के गुनाहों को माफ करते हैं. नबी इरशाद फरमाते हैं कि रमजानुल मोबारक के हर सब असमानुल सुबहे सादीक तक मोनादिये नेदा करता है.
अल्लाह रमजानुल मोबारक की हर सुब में इफ्तार के वक्त 60 हजार गुनाहगारों को दोखज से आजाद फरमा देता है और रमजान के जुम्मे के हर घडी 10 लाख गुनाहगारों की मगफिरत करता है. नबी इरशाद फरमाते हैं कि रमजानुल मोबारक के हर वक्त, हर घड़ी इबादत की है और लोग काफी अहदो एहतराम के साथ करें. अल्लाह बंदो के गुनाहों को माफ करेगा. मौलाना ताजुद्दीन रिजवी ने कहा कि इसलामी साल के 12 महीनों में से सिर्फ रमजान का महीना है जिसका नाम हम सबों को कुरान-ए-करीम में मिलता है. रमजान का मतलब है जला देने वाला. जिस तरह आग सोने को जला कर उसकी गंदगी को दूर कर चमकदार बना देती है. उसी तरह इस महीने की नेकियां और इबादत मुसलमानों को गुनाहों से पाक-साफ कर देती है और चमकाकर खुदा के करीब कर देती है. उन्होंने कहा कि चाहिए की इसका हर लम्हा खुदा की याद और उसकी इबादत में गुजारा जाये एवं पूरे माह तराबी, रोजा व फर्ज नमाजे पाबंदी के साथ अता की जायेगी.
