देवघर : भूमि संरक्षण कार्यालय से बंजर भूमि विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में पूरे जिले कुल 78 तालाबों की स्वीकृति हुई थी. इसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक 70 तालाबों का निर्माण कार्य को पूरा दर्शाया गया . इसके एवज में भूमि संरक्षण कार्यालय से लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान भी […]
देवघर : भूमि संरक्षण कार्यालय से बंजर भूमि विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में पूरे जिले कुल 78 तालाबों की स्वीकृति हुई थी. इसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक 70 तालाबों का निर्माण कार्य को पूरा दर्शाया गया . इसके एवज में भूमि संरक्षण कार्यालय से लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान भी हो चुका है.
लेकिन एक वर्ष में 74 तालाबों में चार करोड़ रुपये खर्च किये जाने के बावजूद इतना भी पानी नहीं है कि मवेशी गरमी में अपनी प्यास बुझा सकें. अधिकांश तालाब तो बिल्कुल सूखा पड़ा रहा है. इन तालाबों में बरसात का पानी स्टोर करने के लिए 55 तालाबों का निर्माण कार्य पिछले वर्ष बरसात से पहले ही चालू हो चुका था , बावजूद तालाब में पानी नहीं होना अपने – आप में कई सवाल छोड़ता है . अगर सूत्रों की मानें तो शेष 19 तालाबों का कार्य आनन-फानन में केवल खानापूर्ति कर राशि का भुगतान कर दिया गया है. चालू वित्तीय वर्ष में भी चार तालाब का कार्य पूरी तरह फाइनल नहीं हो सका है. भूमि सरंक्षण विभाग द्वारा प्रति तालाबों के निर्माण पर तकरीबन 12 से 14 लाख रूपये तक खर्च किये गये हैं.
तीन करोड़ खर्च कर…
लेकिन, बारिश से पहले निर्मित होने के बाद वर्तमान में तालाब में पर्याप्त पानी नहीं है. तालाबों का फायदा रबी फसल में भी किसानों को नहीं मिला .
पानी पंचायत के जरिये कराया गया कार्य : बंजर भूमि विकास योजना के तहत रबी व गरमा फसलों में सिंचाई के लिए इन तालाबों का स्थल चयन विधायकों की अनुशंसा पर ग्राम सभा के जरिये किया गया था. तालाब का निर्माण कार्य पंचायत का गठन कर किया गया. पानी पंचायत में अध्यक्ष व सचिव का चयन कर निर्माण कार्य कराया गया है, लेकिन भूमि संरक्षण कार्यालय में अभियंताओं की कमी की वजह से योजनाओं की मॉनिटनिंग सही ढंग से नहीं हो पायी, जिसका नतीजा है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी किसानों को इसका फायदा नहीं मिला. इस योजना में प्रति तालाब में 90 फीसदी राशि विभाग व 10 फीसदी अंशदान पानी पंचायत ने दिया है.
जिला परिषद की बैठक में उठा था जांच का मुद्दा :बंजर भूमि विकास योजना के तहत तालाबों के निर्माण को लेकर जिला परिषद की बैठक में भी सवाल उठा चुका है. जिला परिषद की बैठक में पूर्व जिप अध्यक्ष किरण कुमारी, मधुपुर के जिप सदस्य दिनेश्वर किस्कु समेत कई जिप सदस्यों ने तालाब की जांच का प्रस्ताव दिया था.
बैठक में तालाब निर्माण प्राक्कलन के अनुसार गहराई व अन्य कार्य नहीं किये जाने का आरोप लगाते हुए कमेटी गठित कर पूरे जिले में जांच की मांग उठी थी. पिछली जिप की बैठक में जिप सदस्यों को केवल तालाबों की सूची मुहैया करा दी गयी, लेकिन कमेटी से जांच नहीं करायी गयी. इस पर जिप सदस्यों ने असंतुष्टि जाहिर करते हुए मुख्य सचिव से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
पिछले वित्तीय वर्ष का लगभग 74 तालाब का कार्य पूरा कर दिया गया. चार तालाबों का कार्य जल्द पूर्ण हो जायेगा. तालाब का निर्माण कार्य प्राक्कलन के अनुसार हुआ है. मापी के बाद ही भुगतान हुआ है. कुछ तालाबों में भुगतान लंबित है, लेकिन आवंटन राज्य मुख्यालय को प्राप्त है.
– निरंजन कुमार, अभियंता, भूमि संरक्षण, देवघर
बुढ़वाकुरा में तालाब का हाल
मोहनपुर प्रखंड स्थित बुढ़वाकुरा गांव में 14,63,200 रुपये की लागत से तालाब का निर्माण हुआ है. यह तालाब वित्तीय वर्ष 16-17 का है. तालाब का निर्माण कार्य बरसात से पहले ही हुआ है. लेकिन तालाब में पानी एक फीट भी नहीं है. इस तालाब की गहराई भी पर्याप्त नहीं है. खानापूर्ति कर किसी तरह तालाब तैयार कर दिया गया है. बुढ़वाकुरा पानी पंचायत के सचिव रामजीवन यादव का कहना है कि प्राक्कलन के अनुसार कार्य कर दिया गया है. इसमें कोई खानापूर्ति नहीं हुई है. वर्तमान में तालाब में जो पानी है, वह 10 दिनों पहले हुई बारिश का पानी जमा है. इस बाबत पूछे जाने पर अभियंता ने केवल प्राक्कलन की बात बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया .