वर्तमान में मधुपुर में कचरा प्रबंधन का कोई इंतजाम नहीं है. जिसके कारण जहां-तहां कचरा फेक दिया जाता है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत कचरा प्रबंधन के लिए बौगेया में तकरीबन 14 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है. पूर्व में 35 लाख की लागत से इसके कुछ हिस्से में चहारदीवारी भी नगर पर्षद द्वारा करायी गयी है. लेकिन आगे का काम अटका पड़ा हुआ है. कचरा प्रबंधन के लिए नगर पर्षद कार्यालय को 2.55 करोड़ की राशि की पहली किश्त आ चुकी है. इसके निर्माण से ही स्थायी समाधान हो सकेगा.
कचरा फेंक खुद मिटा रहे जोरिया का वजूद
मधुपुर: शहर से नियमित रूप से निकलने वाले कचरे को भेड़वा व चांदमारी के बीच स्थित जोरिया में प्रतिदिन फेंका जा रहा है. जिससे जोरिया का अस्तित्व खतरे में है. तपती गर्मी के कारण वैसे ही आसपास के पतरो व जयंती नदी समेत दर्जनों जोरिया, तालाब, कुआं व चापाकल के जल स्रोत सूख चुके हैं. […]

मधुपुर: शहर से नियमित रूप से निकलने वाले कचरे को भेड़वा व चांदमारी के बीच स्थित जोरिया में प्रतिदिन फेंका जा रहा है. जिससे जोरिया का अस्तित्व खतरे में है. तपती गर्मी के कारण वैसे ही आसपास के पतरो व जयंती नदी समेत दर्जनों जोरिया, तालाब, कुआं व चापाकल के जल स्रोत सूख चुके हैं. लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में नदियों व जोरिया जैसे जल स्रोत को बचाने के बजाए इसके अस्तित्व को ही समाप्त करने पर तुले हुए हैं. बताया जाता है कि भेड़वा व चांदमारी के बीच के जोरिया का अधिकतर भाग अभी भी जिंदा है. जल स्रोत निकल रहा है. जिससे आसपास के कुआं व चापाकल जिंदा हैं.
लेकिन इस जोरिया में एक हजार फीट तक नियमित रूप से नगर पर्षद द्वारा कचरा फेंका जा रहा है. जिससे काफी दूरी तक जोरिया का अस्तित्व अब समाप्त हो चुका है. बताया जाता है कि प्रत्येक दिन 16 ट्रैक्टर व चार ऑटो टिपर कचरा शहर से निकाल कर उक्त स्थल पर डंप किया जा रहा है. कचरा जहां फेंका जा रहा है वह नगर पर्षद की जमीन है. लेकिन लापरवाही के कारण अधिकतर कचरा जोरिया में फेंक दिया गया है.
कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी
जहां कचरा फेका जा रहा है वह नगर पर्षद की जमीन है. कचरा प्रबंधन की दिशा में काम हो रहा है. जिसके बाद वहां का भी कचरा हटा दिया जायेगा.
रंजन सिन्हा, कार्यपालक पदाधिकारी, नप