उदासीनता. मातृ मंदिर बालिका मवि देवघर का हाल, उधार के कमरों में चल रहा विद्यालय, फैली है गंदगी

देवघर : स्कूलों में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ एवं ‘खुले में शौच मुक्त’ अभियान को सफल बनाने में भारत सरकार से लेकर राज्य सरकार जुटी है. वर्तमान में प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में दाखिले के लिए ‘विद्यालय चलें चलाएं अभियान’ चल रहा है. लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है. बीच शहर में स्थित […]

देवघर : स्कूलों में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ एवं ‘खुले में शौच मुक्त’ अभियान को सफल बनाने में भारत सरकार से लेकर राज्य सरकार जुटी है. वर्तमान में प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में दाखिले के लिए ‘विद्यालय चलें चलाएं अभियान’ चल रहा है. लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है. बीच शहर में स्थित राजकीयकृत मातृ मंदिर बालिका मध्य विद्यालय डीएसइ कार्यालय कैंपस में उधार के दो कमरे में चल रहा है.

इस स्कूल का न तो अपना कोई शौचालय है, न मूत्रालय और न चापानल. नतीजा विद्यालय में अध्ययनरत लड़कियों को खुले में मल-मूत्र त्याग करना पड़ता है. स्कूल कैंपस में भी चारों तरफ गंदगी फैली हुई है. मध्याह्न भोजन पकाने के लिए जिस चापानल से पानी लाया जाता है, वहां गंदगी का अंबार लगा है.

बच्चों की उपस्थिति औसत से भी कम : दाखिले के लिए देवघर में ‘विद्यालय चलें चलाएं अभियान’ चल रहा है. 26 अप्रैल तक चलने वाले अभियान कार्यक्रम की सफलता के लिए देवघर के प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी दिन के दो बजे लगायी गयी है. बावजूद स्कूल में छात्रों की उपस्थिति 25 से 30 फीसदी होती है.
एमडीएम में नहीं हो रहा है मेन्यू व क्वालिटी का अनुपालन
विद्यालय के बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा तो जाता है, लेकिन छात्रों की मानें तो निर्धारित मेन्यू के तहत न तो भोजन परोसा जाता है और न ही क्वालिटी का अनुपालन किया जाता है. मध्याह्न भोजन पकाने के लिए आज भी लकड़ियों का प्रयोग ही किया जा रहा है.

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