जसीडीह इंडस्ट्रियल इलाके में लकड़ी तस्करों का खेल
देवघर : जसीडीह इंडस्ट्रीयल एरिया में कई बंद पड़ी इकाइयों से लगातार कीमती पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से हो रही है. पिछले दिनों एक बड़ी कंपनी की बंद इकाई से तकरीबन दो से तीन करोड़ के पेड़ काट लिये गये.
काटे गये पेड़ों में सागवान, शीशम, चंदन, यूकेलिप्टस आदि कीमती पेड़ शामिल हैं. कीमती पेड़ों की तस्करी के खेल में देवघर के बड़े लकड़ी तस्कर बंद पड़े उद्योगों के तथाकथित केयरटेकर शामिल हैं. इस दिशा में न तो वन विभाग कोई कार्रवाई कर रही है और न ही स्थानीय पुलिस. विभागीय उदासीनता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब पेड़ काटने की भनक मिली वहां के मजदूर यूनियन को मिली तो उन्होंने लिखित शिकायत स्थानीय थाना, डीएफओ, सीएफ को दिया.
लेकिन जब तक रेंजर जाकर देखते, वहां से कटे पेड़ गायब हो गये, सिर्फ तना ही दिखा. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. उसके बाद यूनियन ने एसडीओ को शिकायत दी. एसडीओ ने इसे गंभीरता से लिया और सीओ को जांच का आदेश दिया है.
क्या है मामला
इस संबंध में कर्मचारी यूनियन के एक सदस्य ने बताया कि, कुछ वर्ष पूर्व तक वे सभी देश की एक नामी–गिरामी कंपनी में काम करते थे. बाद में वो कंपनी यहां से दूसरे शहर में शिफ्ट कर गयी. कंपनी से जुड़े होने के कारण काफी संख्या में यहां के लोग बेरोजगार हो गये.
अपने हक के लिए यूनियन की ओर से कंपनी पर मुआवजे के लिए कोर्ट में दावा किया गया. मामला अब भी कोर्ट में लंबित है. इस बीच समय गुजरता रहा. जबकि कंपनी के परिसर 300 से 400 की संख्या में चंदन, पलाश, खैर, शाल, सागवान, सखुआ आदि के वृक्ष लगे हुए थे. धीरे–धीरे लकड़ी माफियाओं की नजर इन वृक्षों पर पड़ी. उन लोगों ने एक–एक कर वृक्ष को काटना शुरू किया. यूनियन ने इस बात की जानकारी जिला प्रशासन व संबंधित थाना प्रभारी को लिखित रूप से दी. मगर कोई सुनवाई नहीं हुई. बाद में यूनियन ने वन विभाग के वरीय पदाधिकारी सीएफ व डीएफओ को लिखित शिकायत की.
सीएफ के निर्देश पर क्षेत्रीय रेंजर भी उक्त स्थल का जायजा लिया. तो वहां पेड़ तो कम ही दिखे. मगर वहां पेड़ों के कटे तनों के प्रमाण मिले. उन्होंने इस बात की सूचना विभाग के वरीय पदाधिकारी को दी. जानकारों की मानें तो उन वृक्षों की बाजार वेल्यू दो से तीन करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है.
