संजीत मंडल
Deoghar: संताल परगना प्रमंडल में हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनावों के दौरान लोकतंत्र की जमीनी हकीकत सामने आयी है. मेयर और अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में 12 नगर निकायों के अंतर्गत कुल 22,572 वोट रद्द हो गये. यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि चुनावी व्यवस्था, मतदाता प्रशिक्षण और जागरुकता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है.
देवघर और साहिबगंज में सबसे अधिक रद्द वोट
आंकड़ों पर नजर डालें तो देवघर नगर निगम में सबसे अधिक 6,114 वोट रद्द किये गये. इसके बाद साहिबगंज नगर परिषद में 3,496 वोट अमान्य पाये गये. जानकारों के अनुसार, बड़े शहरी निकायों में मतदाताओं की संख्या अधिक होने के साथ-साथ बैलेट पेपर की जटिलता भी रद्द वोटों का एक बड़ा कारण बनती है.
मधुपुर, पाकुड़ और मिहिजाम में भी हजारों वोट बेअसर
अन्य निकायों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं रही. मधुपुर नगर परिषद में 2,129, पाकुड़ नगर परिषद में 1,793 और मिहिजाम नगर परिषद में 1,721 वोट रद्द हुए. इसी तरह दुमका नगर परिषद (1,554), गोड्डा नगर परिषद (1,439) और जामताड़ा नगर पंचायत (1,343) में भी बड़ी संख्या में मतदाता अपनी पसंद दर्ज नहीं करा सके.
छोटे नगर पंचायतों में भी दिखी वही तस्वीर
छोटे निकाय भी इस समस्या से अछूते नहीं रहे. महागामा नगर पंचायत में 1,050, बरहरवा नगर पंचायत में 834, बासुकिनाथ नगर पंचायत में 725 और राजमहल नगर पंचायत में 374 वोट रद्द हुए.
आखिर क्यों रद्द हुए इतने वोट
राजनीतिक विश्लेषकों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े जानकारों के अनुसार, इसके पीछे कई संभावित कारण सामने आ रहे हैं. मतदाताओं को मेयर/अध्यक्ष पद के लिए मतदान की सही प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं मिल पायी. कई मामलों में एक से अधिक जगह मुहर लगने, गलत चिन्ह पर मतदान करने या बैलेट पेपर को ठीक से मोड़ने में चूक के कारण वोट अमान्य घोषित हुए. इसके अलावा उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने से भ्रम की स्थिति बनी, जिसका असर विशेष रूप से बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे मतदाताओं पर पड़ा.
परिणामों की वैधता पर भी उठे सवाल
चुनावी जानकारों का कहना है कि कई निकायों में जीत और हार का अंतर रद्द वोटों की संख्या से कम या उसके आसपास हो सकता है. ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि ये वोट वैध होते, तो चुनाव परिणाम की तस्वीर कुछ और हो सकता था.
प्रशासन और आयोग के लिए चेतावनी
संताल परगना में रद्द हुए 22,572 वोट प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग के लिए एक स्पष्ट चेतावनी माने जा रहे हैं. विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य के चुनावों में मतदाता जागरुकता अभियान को और प्रभावी बनाया जाये, बैलेट पेपर को सरल किया जाये और मतदान से पहले मॉक वोटिंग व प्रशिक्षण को अनिवार्य रूप से मजबूत किया जाये.
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