चुनावी गप शप–कानाफूसी (कॉलम)
खटहरी मोटरसाइकिल की शान, चबा रहे हैं पानदेवघर :कचहरी कैंपस में आज स्क्रूटनी का दिन था. कुछ लोगों का करेजा धकधका रहा था. साथ ही दिल पों..पों कर रहा था. मन गिलपिल था. कई छुटभैया नेता तो आस में थे कि परीक्षा में हमरा कंडीडेट पास करता है कि फेल. समय करीब ग्यारह बजता होगा. […]
खटहरी मोटरसाइकिल की शान, चबा रहे हैं पानदेवघर :कचहरी कैंपस में आज स्क्रूटनी का दिन था. कुछ लोगों का करेजा धकधका रहा था. साथ ही दिल पों..पों कर रहा था. मन गिलपिल था. कई छुटभैया नेता तो आस में थे कि परीक्षा में हमरा कंडीडेट पास करता है कि फेल. समय करीब ग्यारह बजता होगा. कैंपस के निकट सैकड़ों बाइकधारी नेता आहिस्ते आहिस्ते जम गये. जितने नेता… उतने बाइक. लग रहा था कि पुरानी बाइक का सेल सेंटर लगाया गया हो. खटरी बाइक, न तो नंबर प्लेट और न शीशा. टूटी डिक्की..जंग लगी बाइक की बॉडी. पास में एक पान की दुकान है. छुटभईया नेताजी छगड़ी-बकरी की तरह पान चभर चभीर चबा रहे थे. उपर से जर्दा भी डकारे जा रहे थे. एक नेता- अरे –! चार साल के बाद मेरी धन्नो निकली है. दूसरा – हम तो अपनी धन्नो को सिर्फ वोट के समय ही निकालते हैं. नेताजी का तेल और टाका…हमलोगों की चांदी. कोई जीते चाहे कोई हारे. हमारी धन्नो दुल्हन की तरह पांच साल में एक बार संजीवनी खाकर गांव से शहर तक दौड़ती है. स्क्रूटनी का समय खत्म हो जाता है. चुनावी यौद्धा खटहरी बाइक सेल सेंटर स्थल पर एक एक कर आते जाते हैं.जी सब पास …कोई फेल नहीं. ( हमने खबर दो बार पढ़ ली है..)
