देवघर : संताल परगना दुमका के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ने आरएल सर्राफ हाइस्कूल देवघर के प्रधानाध्यापक मोहन प्रसाद साह से स्पष्टीकरण पूछा है. स्पष्टीकरण का जवाब 24 घंटे में मांगा है. 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले प्रधानाध्यापक मोहन प्रसाद साह के पेंशन आदि का लाभ इस मामले के निबटारे के बाद ही करने का निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारी देवघर को दिया गया है.
आरडीडीइ कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि प्रधानाध्यापक के विरुद्ध सात बिंदुओं पर आरोप लगाया है. प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय विकास कोष से वर्ष 13 एवं 14 में स्वयं प्रधानाध्यापक व वरीय शिक्षक से चेक पर हस्ताक्षर कर विकास कोष से अवैध निकासी कर राशि गबन कर लिया गया. वर्ष 13 से 18 तक विकास कोष से लगभग नौ लाख रुपये की निकासी कर ली गयी है.
एक निर्माण कार्य का प्राक्कलन कनीय अभियंता से तैयार कराया गया. लेकिन, इन्होंने सिर्फ कनीय अभियंता से ही हस्ताक्षर कराया. वर्ष 13 से 18 तक विकास कोष से निकाली गयी राशि के सामंजन के लिए गार्ड फाइल में जो प्रमाण साटा गया है.
वह कैश मेमो नहीं है. विकास कोष समिति की बैठक में निर्णय लेकर नियमानुसार राशि की निकासी के लिए प्रशासनिक स्वीकृति लेना पड़ता है. लेकिन, इन्होंने सिर्फ समिति से निर्णय लेकर बगैर प्रशासनिक स्वीकृति के राशि निकासी कर ली. राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के खाते से इन्होंने 17 लाख रुपये की निकासी कर ली. आरएमएसए कमेटी वर्ष 10 में बनी हुई है.
जो आज तक कायम है. प्रधानाध्यापक सह सचिव का दायित्व है कि प्रत्येक तीन साल बाद नयी कमेटी बनाने के लिए अभिभावकों की बैठक करना अनिवार्य है. लेकिन, इन्होंने षडयंत्र के तहत कमेटी नहीं बनायी गयी. आरएमएसए के तहत जो निर्माण कराया गया उसके प्राक्वलन एवं मापी पुस्तिका पर सहायक अभियंता की सहमति व हस्ताक्षर नहीं है. जीएसटी लागू होने के बाद आरएमएसए के तहत निर्माण कार्य में जीएसटी का अनुपालन नहीं किया गया.
