उउवि बलनाडीह को नहीं है अपना भवन

देवघर: देवीपुर प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय बलनाडीह को अपना स्थायी भवन नहीं है. विद्यालय में नामांकित 225 छात्र-छात्रएं वर्तमान में संकुल व पंचायत भवन में जैसे-जैसे बैठ कर पढ़ाई करने को विवश हैं. विद्यालय प्रबंधन ने कई दफा विभागीय पदाधिकारियों से स्थायी भवन व जमीन उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन, अबतक […]

देवघर: देवीपुर प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय बलनाडीह को अपना स्थायी भवन नहीं है. विद्यालय में नामांकित 225 छात्र-छात्रएं वर्तमान में संकुल व पंचायत भवन में जैसे-जैसे बैठ कर पढ़ाई करने को विवश हैं.

विद्यालय प्रबंधन ने कई दफा विभागीय पदाधिकारियों से स्थायी भवन व जमीन उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन, अबतक इस दिशा में सकारात्मक पहल नहीं हुआ है. नतीजा जाड़ा-गरमी हो या बरसात, प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए विद्यालय में छात्र-छात्रएं अध्ययन करते हैं. विद्यालय में दो पूर्ण एवं अल्पकालीन प्रतिनियोजित शिक्षक हैं. उच्च विद्यालय में शैक्षणिक सहित अन्य गतिविधियों के सफल संचालन के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. लेकिन, देवघर के परिप्रेक्ष्य में इसका सकारात्मक महत्व नहीं दिख रहा है.

आसपास के विद्यालय में उपलब्ध है कमरा

उत्क्रमित उच्च विद्यालय बलनाडीह के नजदीक मध्य विद्यालय बेहरम में 10 कमरे वाला दो मंजिला भवन है. मध्य विद्यालय घसको भी दो मंजिला भवन में आठ कमरा है. यहां विद्यार्थियों की संख्या कमरे के अनुपात में कम है. अगर भवनहीन उच्च विद्यालय को मध्य विद्यालय भवन में शिफ्ट कर दिया जाये. तो वहां के छात्र-छात्रओं के अलावा शिक्षकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है.

‘भूमिहीन विद्यालय में वर्ष 2008 से पदस्थापित हूं. विद्यालय भवन नहीं होने की वजह से छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. जबकि मैट्रिक की परीक्षा में विद्यालय का परीक्षा परिणाम बेहतर रहता है. विद्यालय प्रबंधन एवं विकास कोष में सात लाख रुपये है. लेकिन, जमीन के अभाव में राशि बेकार पड़ा है.’

– उमाकांत शाही, प्रभारी प्रधानाध्यापक, उत्क्रमित उच्च विद्यालय बलनाडीह

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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