देवघर : हत्या मामले के तीन दोषियों मकबूल अंसारी उर्फ मकबूल आलम, हफीज आलम व मकसूद आलम को सश्रम उम्रकैद की सजा भरी अदालत में सुनायी गयी. साथ ही प्रत्येक दोषियों को 50 हजार रुपये करके जुर्माना लगाया गया. जो राशि मृतक सदाब अंसारी की पत्नी को दी जायेगी. जुर्माना की राशि अदा न करने पर अलग से एक साल की कैद काटनी होगी.
यह सजा सेशन जज पांच अनिल कुमार मिश्रा की अदालत की ओर से अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद सुनायी गयी. केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय ने 14 लोगों को गवाह के तौर पर प्रस्तुत कराया व दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की. सूचक की ओर से सहयोगी अधिवक्ता रंजन कुमार मिश्रा भी थे जबकि बचाव पक्ष से वरीय एडवोकेट इशहाक अंसारी ने पक्ष रखा. यह मामला मृतक के भाई मो नैयाब ने मधुपुर थाना में दर्ज कराया था.
कैसे हुई थी सदाब अंसारी की हत्या
मधुपुर थाना क्षेत्र के झुनका गांव में यह घटना 27 सितंबर 2016 को घटी थी. दर्ज एफआइआर के अनुसार मो सदाब अंसारी गिरिडीह वाली ट्रेन से नबाव मोड़ हाल्ट पर उतरकर अपना घर जा रहा था तो रास्ते में वासुदेव पुजहर घर के पास चार लोगों ने उन्हें दबोचा व अपने आंगन में घसीट कर ले गया जहां पर फरसा, तलवार व रड के वार से हत्या कर दी. मृतक के भाई हल्ला पर पहुंचा तो उनको भी आरोपितों ने पीटा. घटना की सूचना पुलिस प्रशासन को दी गयी तब पुलिस आयी व मकसूद के आंगन से शव को बरामद किया.
खुलासा किया गया है कि जमीन को लेकर मृतक व आरोपितों के बीच झगड़ा चल रहा था. मौका पर आरापितों ने उक्त घटना को अंजाम दिया. मृतक के भाई मो नैयाब के लिखित आवेदन पर मधुपुर थाना में केस दर्ज हुआ. पश्चात पुलिस ने केस का अनुसंधान पूरा कर आरोप पत्र दाखिल किया.
पुन: मधुपुर से इस केस को ट्रायल के लिए पीडीजे के काेर्ट में भेज गया जहां से ट्रांसफर का उक्त अदालत में भेजा गया जहां से तीनों को हत्या का दोषी पाकर आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी. तीनों आरोपित 15 अक्तूबर 2016 से ही जेल में है. इसमें उपरोक्त तीनों आरोपितों के अलावा एक अन्य आरोपित महफूज का भी नाम है जिसके विरुद्ध अनुसंधान जारी है.
