खस्ताहाल. ड्रम काट कर बन रहा था कूड़ेदान, एक की गयी थी जान
कीटनाशक कारखाने के निदेशक ने किया खुलासा
फॉरेंसिक टीम ने की हादसे की जांच
नप के पास कूड़े दान के लिए नहीं है फंड
व्यवसायियों से सहयोग लेकर डस्टबिन बांटता है नप
मधुपुर : नगर पर्षद की ओर से शहरी क्षेत्र में पर्याप्त कूड़ेदान नहीं लगाया गया है. इसके कारण दुकानदार व राहगीर जहां तहां कूड़ा फेंकने को विवश हैं. पिछले पांच वर्षों के नप के कार्यकाल में सिर्फ 24 छोटे डस्टबिन खरीदे गये थे. इसमें प्रत्येक की कीमत तकरीबन 700 रुपये थी. इसके अलावा शहर की विभिन्न सड़कों किनारे ईंट व सीमेंट से 15 डस्टबिन तीन वर्ष पूर्व बनाये गये थे. इसमें एक दर्जन टूट कर अव्यावहारिक हो चुका है. ऐसे में बार बार प्रशासन स्वच्छता अभियान चला रही है. लोग कूडा-कचरा कहां फेंकेंगे. इसकी ठोस व्यवस्था नहीं है.
नप के कार्यपालक पदाधिकारी व प्रशासन व्यवसायियों के सहयोग से ड्रम कटवा कर जगह-जगह वितरित कर रहे हैं. समय समय पर स्वच्छता अभियान चला कर इन्हीं ड्रमों को चौक-चौराहों पर लगवा रही है. जबकि नप के पास अलग अलग मद में लाखों राशि है. इससे बेहतर व टिकाऊ डस्टबिन निविदा के माध्यम से लेकर लगाया जा सकता था.
पूर्व में हो चुका है हादसा
बावन बीघा में एक कीटनाशक बनाने वाले कारखाने में पिछले नौ फरवरी को ड्रम काटने के दौरान हुए हादसे में एक मजदूर की मौत हो गयी, जबकि दूसरा घायल है. इसको लेकर कारखाना के निदेशक ने संताल परगना के डीआइजी को पिछले दिनों पत्र लिख कर विस्तार पूर्वक निष्पक्ष जांच की मांग की है. निदेशक ने बताया कि पूर्व में ड्रम कटवा कर नप को दिया गया है और ड्रम काटने के दौरान ही हादसा हुआ. जिसमें मौत हुई.
कहते हैं नप अध्यक्ष
नप अध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में 15 सीमेंट व ईंट का कूड़ेदान बनाया था. तीन माह पूर्व छोटे-छोटे 24 कूड़ेदान खरीदे गये थे. व्यवसायियों के सहयोग से ड्रम काट कर बनाया गया करीब सौ कूड़ेदान स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए शहर में जगह-जगह लगाये गये हैं. अधिकारियों के बार-बार तबादले के कारण पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान की खरीद नहीं हो पायी.
