मेयर-डिप्टी मेयर को भी नहीं मिली खबर
दो दिनों तक किया देवघर का भ्रमण
सार्वजनिक जगहों का किया दौरा, लोगों से पूछे सवाल
देवघर : सर्वेक्षण प्रतियोगिता 2018 के तहत देशभर के 4041 नगर निकायों के स्वच्छता की जांच कर रही क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआइ) की टीम बुधवार को देवघर पहुंची. दो दिनों तक देवघर में रहने के दौरान शहर के तालाब, बस स्टैंड, स्टेशन, मॉल, कॉलोनी आदि सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया. शुक्रवार को टीम जसीडीह पहुंची. वहां के सुलभ शौचालय व तालाब आदि का जायजा लिया. टीम के सदस्य तीन दिनों तक लोगों से मिले. उनसे सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी ली. इसमें एक हजार अंक था. नकारात्मक जवाब मिलने से अंक में कटौती होना तय था. समझा जा रहा है कि अंक कटने के डर से टीम को मीडिया व अधिकांश पार्षदों से दूर रखा गया. कुछ पार्षदों को भनक लग गयी थी, लेकिन उन्हें भी सही जानकारी नहीं दी गयी.
मेयर-डिप्टी मेयर भी बेखबर: सर्वेक्षण टीम देवघर आने की खबर मेयर रीता राज खवाड़े व डिप्टी मेयर नीतू देवी को भी विधिवत नहीं दी गयी. निगम प्रशासन की कार्यशैली से निगम के दोनों वरीय जन प्रतिनिधि आश्चर्यचकित व नाराज हैं. इस संबंध में मेयर प्रतिनिधि बमबम झा से पूछने पर बताया कि उनको कोई जानकारी निगम से नहीं मिली है, वहीं डिप्टी मेयर नीतू देवी से पूछने पर बताया कि सीइओ से बात करने पर टीम के दो दिनों तक देवघर में रहने के बाद शुक्रवार को जाने की बात कही है. सीइओ ने खुद पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही. डिप्टी मेयर ने कहा कि इसमें छिपानेवाली बात नहीं होनी चाहिए. पता नहीं क्या जानकारी छिपायी जाती है.
स्वच्छता एप पर टीम ने पूछे लोगों से सवाल
आपका शहर स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में भाग ले रहा है. आपका क्षेत्र पिछले साल के
मुकाबले अधिक साफ है या नहीं
नये वर्ष में आपने सार्वजनिक क्षेत्रों में कूड़े के डिब्बे का उपयोग
शुरू किया है या नहीं
अपने घर से गीला व सूखा अलग-अलग कूड़ा संग्रहण
कार्य से संतुष्ट हैं या नहीं
खुले में पेशाब व शौच करनेवालों की संख्या घटी है या नहीं
सार्वजनिक शौचालय अब अधिक साफ और सुलभ है या नहीं
चार जनवरी की किया था मधुपुर का दौरा
सर्वेक्षण प्रतियोगिता 2018 चार जनवरी से शुरू हुई है. इसके तहत देश भर के 4041 नगर निकायों की स्वच्छता की जांच की जा रही है. केंद्र सरकार की क्यूसीआइ (क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया) टीम चार जनवरी को मधुपुर का दौरा किया था. इसके बाद से ही देवघर आने का कयास लगाया जा रहा था. मधुपुर के बाद दुमका, बासुकिनाथ आदि आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण किया, लेकिन एक माह बाद देवघर पहुंची.
