20 करोड़ वर्ष पुराने फॉसिल्स के संरक्षण पर राज्य सरकार निष्क्रिय

देवघर : साहिबगंज के 20 करोड़ वर्ष पुराने फॉसिल्स जैसे पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण के प्रति झारखंड सरकार गंभीर नहीं है.पत्थर माफिया और सरकारी महकमों के गठजोड़ ने फॉसिल्स के संरक्षण के लिए बननेवाले फॉसिल्स पार्क की योजना पर ब्रेक लगा रखा है. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने जब से गोड्डा सांसद निशिकांत […]

देवघर : साहिबगंज के 20 करोड़ वर्ष पुराने फॉसिल्स जैसे पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण के प्रति झारखंड सरकार गंभीर नहीं है.पत्थर माफिया और सरकारी महकमों के गठजोड़ ने फॉसिल्स के संरक्षण के लिए बननेवाले फॉसिल्स पार्क की योजना पर ब्रेक लगा रखा है. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने जब से गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के प्रस्ताव पर बात आगे बढ़ायी है और राज्य सरकार से पत्राचार शुरू किया है, तब से साहिबगंज में पत्थर खनन व क्रशर का धंधा और तेजी पकड़ने लगा है. तीन सालों में राज्य सरकार द्वारा फैसला नहीं लिये जाने का फायदा पत्थर माफिया उठा रहे हैं. अफसर-माफिया गठजोड़ के कारण पत्थर माफिया लाल हो रहे हैं. स्थिति यह है कि साहिबगंज के अधिकांश पहाड़ गायब हो रहे हैं.

माफिया उठा रहे फायदा : गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने अक्तूबर 2012 में ही साहिबगंज के मंडरो में फॉसिल्स पार्क और देवघर में नेशनल पार्क की स्थापना के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पत्राचार शुरू किया. तभी से केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को फॉसिल्स पार्क और देवघर में नेशनल पार्क बनाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है.

लेकिन राज्य सरकार पत्र का जवाब तक नहीं दे रही है. इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं-न-कहीं राज्य सरकार पत्थर माफियाओं का बचाव कर रही है. क्योंकि फॉसिल्स पार्क बन जाएगा, तो पत्थर खनन, पहाड़ों का दोहन और जंगलों की कटाई बंद हो जायेगी.

राज्य सरकार के जवाब के इंतजार में बीत गये तीन साल : गोड्डा सांसद के प्रस्ताव पर केंद्र ने झारखंड सरकार को 2014 अक्तूबर में पत्र लिखा, जिसमें राज्य सरकार से फॉसिल्स पार्क की स्थापना को लेकर कमेंट मांगा गया. क्योंकि केंद्र सरकार साहिबगंज के मंडरो में फॉसिल्स के संरक्षण के लिए इस इलाके को जिओ हेरिटेज साइट के रूप में विकसित करना चाहती है.

राज्य सरकार ने जवाब नहीं दिया. तब यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. फिर गोड्डा सांसद ने इसको लेकर प्रधानमंत्री व विभाग से पत्राचार किया. यहां तक लोकसभा में भी आवाज उठायी. तब अगस्त 2017 को फिर केंद्र सरकार ने झारखंड के वन विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा और कहा कि 2014 में ही राज्य सरकार से इस संबंध में कमेंट मांगा गया था, लेकिन जवाब नहीं आया. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने झारखंड के प्रधान सचिव से कहा कि अविलंब इस पर जवाब दें, ताकि संसद और प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी जानकारी दी जा सके. इस पत्र का भी जवाब राज्य सरकार ने नहीं दिया. पुन: दिसंबर 2017 में केंद्र सरकार की ओर से मुख्य सचिव झारखंड को पत्र भेजा गया, जिसमें पिछले सभी पत्राचार का जिक्र करते हुए अविलंब राज्य सरकार का जवाब मांगा गया है. इस तरह राज्य सरकार के जवाब के इंतजार में तीन साल बीत गये.

क्यों जरूरी है फॉसिल्स का संरक्षण

राजमहल की पहाड़ियों के कई हिस्से खास कर मंडरो इलाके में करोड़ों वर्ष पुराने प्लांट फॉसिल्स मिले हैं. इसके अलावा साहिबगंज के हिजड़ी, खेसारी पहाड़, बसको बेड़ा, बांसकोला तारापहाड़ में भी फॉसिल्स के कुछ अंश जैसे टीलोफाइलम, ग्लोसोपटीज, विलियम सोनिया के ग्रुप के साथ ही कैलेमेटिज मिले हैं. लेकिन अंधाधुंंध पहाड़ों के विनाश व पत्थर खनन के कारण बेशकीमती ऐतिसाहिक धरोहर कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं.

फॉसिल्स का यह क्षेत्र भूगर्भशास्त्रियों के लिए शोध का बेहतर स्थान साबित हो सकता है. क्योंकि भूगर्भशास्त्री ओल्डहम व मॉरिस ने 1833 और बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालाबॉटनी के संस्थापक प्रो बीरबल साहनी ने 1928 में राजमहल की पहाड़ियों पर दुर्लभ फॉसिल्स का जिक्र करते हुए इसके संरक्षण की बात कही थी.

देवघर में क्यों जरूरी है नेशनल पार्क

देवघर के कोयरीडीह स्थित डिगरिया पहाड़ के जंगलों के संरक्षण के लिए वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी/नेशनल पार्क बनाने की पहल गोड्डा सांसद ने की थी. केंद्र ने राज्य सरकार से नेशनल पार्क की स्थापना के लिए भी पत्राचार किया है. लेकिन सरकार ने इसको लेकर भी गंभीरता नहीं दिखायी है. इसका नतीजा है कि जंगल की अंधाधुंध कटाई हो रही है और लकड़ी माफिया मालामाल हो रहे हैं.

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