बिहार-झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक मशीन उपलब्ध कराने की सरकार से मांग
अवैध रूप से चल रहे पैथोलॉजी को बंद कराने के लिए सरकार
करे पहल
देवघर : जसीडीह के पंचायत प्रशिक्षण केंद्र में बिहार चैप्टर पैथोलॉजिस्ट के 13वां वार्षिक कॉन्फ्रेंस ‘बेपकॉन-2018’ का रविवार को समापन हो गया. इसमें विभिन्न राज्यों से लगभग दो सौ पैथोलॉजिस्ट ने हिस्सा लिया.
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक व शोध पत्र प्रस्तुत किये. कार्यक्रम में डॉ अस्विवा मंडल, डॉ जगदीश केशकर, डॉ अमर रंजन सिंह, ब्लड कैंसर रोग विशेषज्ञ एम्स नयी दिल्ली के पैथोलॉजिस्ट ने देश भर से आये सभी पैथोलॉजी डॉक्टरों को बताया कि तीन माह पहले फ्लो साइटोमीटर मशीन हमारे देश में बनाया जा चुका है.
इससे ब्लड कैंसर की जांच की जा सकती है. ब्लड कैंसर को प्रथम स्टेज में यदि इस मशीन से जांच कर लें, तो इसका इलाज संभव हो सकता है. झारखंड या बिहार में इस मशीन का उपयोग या इसकी जानकारी नहीं होने के कारण बीमारी का सही पता नहीं चल पाता है और कैंसर गंभीर रूप धारण कर लेती है. इस स्थिति में मरीज को बचाना संभव नहीं हो पाता है.
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मशीन को राज्य के मेडिकल्स कॉलेजों में उपलब्ध करा दे, तो लोगों की जान बचायी जा सकती है. साथ ही कहा कि देश में रक्त संबंधित जांच करने के लिए कई उच्चस्तरीय जांच मशीन आ गये है, लेकिन सरकार मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध नहीं करा पा रही है. इससे गरीबों की उचित इलाज संभव नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में अवैध रूप से चल रहे पैथोलॉजी को बंद कराने के लिए सरकार पहल करे. यह भी घोषणा की गयी कि अगला कॉन्फ्रेंस बिहार के पूर्णिया में आयोजित किया जायेगा.
कहते हैं पैथोलॉजिस्ट
फ्लो साइटोमीटर मशीन के बिना डायग्नोसीस्ट नहीं होता है, इससे इलाज संभव नहीं हो सकता है. मशीन के बिना ब्लड कैंसर बीमारी का इलाज नहीं होता है. यह मशीन बिहार व झारखंड के किसी मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं है. सरकार इन मशीनों को सरकारी कॉलेजों में जल्द से जल्द उपलब्ध करा दें, ताकि सही तरीके से इलाज मरीजों का किया जा सके.
-डॉ अमर रंजन सिंह
सेमिनार में आकर हम डॉक्टर अपनी-अपनी जानकारी एक-दूसरे से आदान-प्रदान करते हैं, ताकि मरीजों का सही तरह से इलाज किया जा सके. इस बदलते माहौल में कई समस्याओं हो गयी है. इस स्थिति में लोगों का इलाज संभव नहीं हो सकता है.
-डॉ एसएन सिन्हा
पैथोलॉजिस्ट को बढ़ावा देने के लिए इस तरह का सेमिनार का आयोजन किया जाता है, ताकि इससे हमें काफी फायदा मिलता है. ज्ञान आदान-प्रदान करते है. सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आया है कि जो भी लैब हैं उसके जो थी रिपोर्ट मिलते हैं, उसमें पैथोलॉजिस्ट का हस्ताक्षर होना चाहिए, तभी मान्य होगा.
– डॉ रमेश चन्द्र
पैथोलॉजिस्ट के लिए मशीनें काफी महंगी होने के कारण आज भी आम लोगों से मशीन दूर हैं. इस कारण मरीजों का सही इलाज संभव नहीं हो पता है. सरकार की ओर से इस तरह की महंगी मशीन को जल्द से जल्द मेडिकल्स कॉलेजों में उपलब्ध करायी जाये, ताकि पैथोलॉजी में मरीजों की सही जांच हो सके.
-डॉ प्रमोद कुमार
