मंदिर मैनेजर को किससे है खतरा !

देवघर की जनता का डीसी व एसपी से सवाल... देवघर : बाबा मंदिर में श्रद्धालु सिर्फ पूजा करने आते हैं. किसी भी मंदिर के प्रबंधक का मूल कार्य श्रद्धालुओं को समुचित व्यवस्था का लाभ देना होता है. अगर मंदिर प्रबंधक तीर्थ-पुरोहित समाज से हो तो मंदिर परिसर में शांति व शुचिता को लेकर आश्वस्त होना […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 6, 2018 5:41 AM

देवघर की जनता का डीसी व एसपी से सवाल

देवघर : बाबा मंदिर में श्रद्धालु सिर्फ पूजा करने आते हैं. किसी भी मंदिर के प्रबंधक का मूल कार्य श्रद्धालुओं को समुचित व्यवस्था का लाभ देना होता है. अगर मंदिर प्रबंधक तीर्थ-पुरोहित समाज से हो तो मंदिर परिसर में शांति व शुचिता को लेकर आश्वस्त होना लाजिमी है. लेकिन, बाबाधाम में मंदिर मैनेजर दो-दो बॉडीगार्ड लेकर घुमते हैं. यह क्या उनका दिखावा है या सच में उनको जान का खतरा है. ऐसे में देवघर की जनता का डीसी व एसपी से है सवाल कि बाबा मंदिर मैनेजर रमेश परिहस्त को किससे खतरा है? बाबा मंदिर मैनेजर रमेश परिहस्त काे बॉडीगार्ड क्यों? मैनेजर न कोई सरकारी अधिकारी है.
न ही कोई राजनेता, न कोई पूर्व मंत्री या वीवीआइपी? बावजूद इनको जिला प्रशासन से दो बॉडीगार्ड मिला है. जबकि मंदिर प्रभारी अपर समाहर्ता, जो एक सरकारी अधिकारी हैं. उनको एक भी बॉडीगार्ड नहीं है. एक पुलिसकर्मी पर सरकार को औसतन 35-40 हजार रुपये प्रति माह खर्च होता है. इस सवाल को कई बार कई लोगों ने उठाया. बावजूद जिला प्रशासन ने इसकी समीक्षा नहीं की और आज तक बॉडीगार्ड का उपयोग जारी है. यही नहीं जिले के एसडीएम से लेकर जिला जज को एक बॉडीगार्ड दिया गया है. लेकिन बाबा मंदिर मैनेजर को दो बॉडीगार्ड मिला हुआ है. बाबा मंदिर मैनेजर के नाम से दो लाइसेंसी हथियार भी है.
फिर उन्हें किससे खतरा कि पुलिस-प्रशासन द्वारा दो बॉडीगार्ड उपलब्ध करा दिया है. जिले में कभी अगर पुलिसकर्मियों की कमी होती है तो कई वीआइपी के बॉडीगार्ड क्लोज कर लिये जाते हैं, लेकिन बाबा मंदिर मैनेजर का बॉडीगार्ड कभी नहीं हटता है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इनकी पहुंच उपर तक होने के कारण इनके बॉडीगार्ड को हटाने की हिम्मत किसी में नहीं है.
प्रभारी को एक भी नहीं, मंदिर मैनेजर को दो-दो बॉडीगार्ड
मेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ था : परिहस्त
मंदिर प्रबंधक रमेश परिहस्त ने कहा कि 22 सितंबर, 2001 में मेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ था. इसमें बाल-बाल बचे थे. इसके बाद से बॉडीगार्ड मिला है.
रिव्यू करेंगे : एसपी
एसपी नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि जिला सुरक्षा समिति द्वारा किसी को बॉडीगार्ड देने का निर्णय किया जाता है. उनके योगदान करने के पूर्व से मंदिर प्रबंधक को बॉडीगार्ड मिaला है. किस परिस्थिति में उन्हें दो बॉडीगार्ड मिला, इसकी जानकारी नहीं है. अभी यह मामला संज्ञान में आ रहा है. रिव्यू कर जांच करेंगे. अगर बिना खतरा के कोई बॉडीगार्ड लेते हैं तो उन्हें पुलिसकर्मी के वेतन का खर्च विभाग को जमा करना पड़ता है.