एक सप्ताह से आइसीयू बंद, मरीज परेशान

डरावनी खबर l अगर कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ा तो सदर अस्पताल में नहीं होगा इलाज किस कमरे में की गयी वैकल्पिक व्यवस्था, सूचना नहीं देवघर : शहरवासियों के लिए डरावनी खबर है. अगर आप गंभीर रूप से बीमार हैं और आइसीयू में भर्ती होने की नौबत आती है, तो सदर अस्पताल जाने पर […]

डरावनी खबर l अगर कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ा तो सदर अस्पताल में नहीं होगा इलाज

किस कमरे में की गयी वैकल्पिक व्यवस्था, सूचना नहीं
देवघर : शहरवासियों के लिए डरावनी खबर है. अगर आप गंभीर रूप से बीमार हैं और आइसीयू में भर्ती होने की नौबत आती है, तो सदर अस्पताल जाने पर आप मुश्किल में पड़ सकते हैं. सदर अस्पताल का आइसीयू करीब एक सप्ताह से बंद पड़ा हुआ है. विभाग की ओर से आइसीयू के बाहर एक नोटिस चिपकायी गयी है. जिसमें सदर अस्पताल उपाधीक्षक के आदेशानुसार बताया गया है कि मरम्मत कार्य के कारण एक सप्ताह तक आइसीयू विभाग बंद रहेगा. हालांकि, आइसीयू की वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल दूसरे कमरे में की गयी है, लेकिन इसकी सूचना नहीं चिपकायी गयी. विभाग की इस कार्यशैली से मरीज परेशान हैं.
अस्पताल में गंभीर मरीज आने पर व्यवस्था नहीं रहने के कारण डॉक्टर रेफर करने पर ही ज्यादा भरोसा रखते हैं. अस्पताल में पांच बेड का आइसीयू खोले जाने से लोगों में आस जगी थी कि गरीब व असहाय भी आइसीयू में अपने मरीजों को भर्ती कर सकेंगे. जानकारी के अनुसार, आइसीयू के संचालन के लिए अलग से किसी भी डॉक्टर को प्रतिनियुक्त नहीं की किया जा सका है. अस्पताल के ही डॉक्टर व कर्मियों से इसका संचालन कराया जा रहा है.
गरीबों की बढ़ी परेशानी: सदर अस्पताल में गंभीर हालत में दुर्घटनाग्रस्त घायल, बीमारी से ग्रसित बीमारियों से ग्रस्त मरीज पहुंचते हैं. यहां आने वाले मरीज दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के भी होते हैं. जिनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होती है. निजी क्लिनिकों में आइसीयू का खर्चा काफी बढ़ जाता है और सदर अस्पताल का आइसीयू उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है. ऐसे में अस्पताल का आइसीयू बंद होना मरीजों की जान मुश्किल डाल सकता है.
विभाग ने चिपकायी आइसीयू बंद होने की नोटिस
कहते हैं सीएस
आइसीयू के बाथरूम में काम चल रहा है. फिलहाल, दूसरे कमरे में आइसीयू के सामानों को रखा गया है. जहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है.
एससी झा, सिविल सर्जन
गंभीर मरीजों को किया जा रहा रेफर
आइसीयू बंद रहने के कारण दुर्घटना व अन्य गंभीर बीमारी के मरीज अस्पताल पहुंचते ही प्राथमिक इलाज के बाद रेफर करने अलावा डॉक्टर के पास कोई उपाय नहीं रहता. जिससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है.

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