हाथ से नहीं छूट रही मुसीबत की थैली

पॉलीथिन पर बैन . शहर में धड़ल्ले से हो रहा है उपयोग देवघर : देवघर नगर निगम में पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी कागज पर ही सिमट गयी है. शहर में पॉलीथिन का उपयोग बेरोकटोक हो रहा है. सब्जी विक्रेता से लेकर किराना दुकानदार सब पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं. लोगों के हाथों में […]

पॉलीथिन पर बैन . शहर में धड़ल्ले से हो रहा है उपयोग

देवघर : देवघर नगर निगम में पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी कागज पर ही सिमट गयी है. शहर में पॉलीथिन का उपयोग बेरोकटोक हो रहा है. सब्जी विक्रेता से लेकर किराना दुकानदार सब पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं. लोगों के हाथों में पॉलीथिन में सामान लेकर जाते सहज ही देखा जा रहा है. नगर निगम ने देवघर को पॉलीथिन मुक्त शहर घोषित कर रखा है. ऐसे में पॉलीथिन के बेचने, खरीदने व उपयोग करनेवाले तीनों दोषी माने जायेंगे. यह कानूनी रूप ले चुका है. बावजूद लोगों पर असर नहीं
पड़ रहा है.
लोगों में है जागरूकता की कमी : लोगों में पॉलीथिन के प्रति जागरूकता का अभाव है. यही कारण है कि तमाम प्रयास करने के बाद भी रोक नहीं लग पा रही है. लोगों को पॉलीथिन के उपयोग से होनेवाली क्षति से अवगत कराना चाहिए.
निगम की टीम बेअसर : सीइओ ने शहर में पॉलीथिन पर कड़ाई से रोक लगाने के लिए निगरानी टीम का गठन किया है. सिटी मैनेजर प्रियंका कुमारी को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. उनके नेतृत्व में टीम भ्रमण कर कार्रवाई भी कर रही है. लेकिन विशेष असर नहीं दिख रहा है.
कौन-कौन हैं टीम में
टीम में नोडल पदाधिकारी प्रियंका कुमारी, टैक्स दारोगा जय शंकर साह, टैक्स कलेक्टर सदाशिव जजवाड़े, शिबू राम, सहायक अभियंता समीर सिन्हा, कनीय अभियंता मुकुल कुमार आदि शामिल हैं.
कहते हैं नोडल पदाधिकारी
नोडल पदाधिकारी प्रियंका कुमारी ने कहा कि दुकानदारों के आग्रह पर टीम ने कड़ाई कुछ कम कर दी है. अभी भी टीम भ्रमण कर रही है. लेकिन चेतावनी देकर छोड़ देती है. इससे दुकानदारों में कानून का भय नहीं है.
क्या हो रही है क्षति
पॉलीथिन से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है. इससे उपज घट रही है. यह मिट्टी में रहने के बाद भी सड़ती व गलती नहीं है.
व्यावसायिक संघ कर रहे हैं विरोध
पॉलीथिन के उपयोग के मामले में देवघर के कुछ व्यवसायियों को आपत्ति है. वे लोग 50 माइक्रोन से ऊपर के पॉलीथिन के उपयोग करने की मांग कर रहे हैं. इसके लिए कई व्यावसायिक संगठन के नेता नगर निगम में सीइओ से मिल कर अपनी बातों का रखा था. उनसे समझने के लिए 15 दिनों का समय मांगा था.

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