कई इतिहासकारों ने इस रहस्य को जानने की पूरी कोशिश की. प्रसिद्ध विद्वान राहुल सांस्कृत्यायन भी यहां आये थे. बुढ़ैय मेला सैकड़ों वर्ष पुराना है. मेले में सर्कस, तारामाची, नाव, मौत का कुआं, जादू व झूले का लोगों ने भरपूर आनंद लिया. वहीं चाट पकौड़े व मिठाई का लुल्फ भी उठाया. मेले में बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल के हजारों लोग शामिल हुए। वहीं मेले में कई महिलाओं से सोने की चैन, चांदी के जेवर व महिलाओं के पर्स से हजारों रुपये उड़ा लिये. हालांकि इस संबंध में किसी ने भी पुलिस को सूचना नहीं दी.
मेले की सुरक्षा व्यवस्था में देवीपुर थाना थाना प्रभारी पीसी सिन्हा, एसआइ पुनीत उरांव, एएसआइ विजय किशोर सिंह, कृष्णा पाहन व सुभाष राम सुरक्षा बल के साथ मौजूद थे. मौके पर बुढ़ैय पंचायत के मुखिया अशोक राजहंस, बाल गोविंद सिंह, प्रमुख प्रतिनिधि किशोर यादव, शिवनंदन ठाकुर, सहदेव यादव, चुनचुन यादव, जगदंब यादव, प्रदीप यादव, नवल किशोर पांडेय, सीताराम यादव, मनोज यादव, मटरू यादव आदि शामिल थे.
