इसके चलते छोटे-छोटे व सुलहनीय मामलों का ग्राफ कम हुआ है. जनवरी 2017 से अब तक के आंकड़ों पर गौर किया जाये, तो सिविल कोर्ट के विभिन्न न्यायालयों से कुल 723 मामलों को पक्षकारों की सहमति से मीडियेशन सेंटर भेजा गया. इसमें से कुल 237 मुकदमों के पक्षकार आये व सुलह समझौता कर कोर्ट कचहरी के चक्कर से मुक्ति पाये. जानकारी के अनुसार, 436 मुकदमों ने समझौता नहीं हो पाया. इतना ही नहीं 50 मामलों में पक्षकार हाजिर नहीं हुए. असफल हुए व पक्षकार नहीं आने वाले मुकदमों को पुन: ट्रायल के लिए संबंधित कोर्ट भेज दिया गया है.
घरेलू विवाद निबटाना है, तो मध्यस्थता केंद्र आइये
देवघर: सिविल कोर्ट परिसर में बनाये गये न्याय सदन में मध्यस्थता केंद्र चल रहा है. इसमें घरेलू विवाद को सुलझाया जा रहा है. नालसा व झालसा के निर्देश पर न्यायालय में बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने के लिए इस प्रणाली को लाया गया है. इसका सकारात्मक परिणाम भी दिख रहा है. लड़ाई-झगड़ा में […]

देवघर: सिविल कोर्ट परिसर में बनाये गये न्याय सदन में मध्यस्थता केंद्र चल रहा है. इसमें घरेलू विवाद को सुलझाया जा रहा है. नालसा व झालसा के निर्देश पर न्यायालय में बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने के लिए इस प्रणाली को लाया गया है. इसका सकारात्मक परिणाम भी दिख रहा है. लड़ाई-झगड़ा में उलझे सैकड़ों परिवारों को मध्यस्थता के माध्यम से मिलाया जा रहा है.
प्रशिक्षित मीडियेटर हैं नियुक्त
मुकदमों के निष्पादन के लिए डालसा में प्रशिक्षित मीडियेटर बहाल हैं, जो दोनाें पक्षों को विभिन्न प्रकार के सत्र के माध्यम से बुलाते हैं. पक्षकारों की बात को बारीकियों से सुनते हैं व सुलह के लिए प्रेरित करते हैं. वैसे तो केस के दोनों पक्षकार अपने वादों को स्वत: मध्यस्थ की उपस्थति में सुलझाते हैं. मामले में सुलह होने के बाद अवार्ड यानि समझौता पत्र बना दिया जाता है जिसमें सभी पक्षकार सहमति से अपना-अपना हस्ताक्षर व अंगूठे का निशान अपने अधिवक्ता की उपस्थिति में करते हैं. देवघर न्याय सदन में करीब 10 मध्यस्थ नामित हैं, जो निर्धारित समय पर मिले मुकदमों के पक्षकारों के बीच सुलह कराते हैं.
भेजे गये मामलों की स्थिति
महीना मुकदमों की संख्या
जनवरी 58
फरवरी 40
मार्च 135
अप्रैल 58
मई 55
जून 52
जुलाई 136
अगस्त 101
सितंबर 53
अक्तूबर 25
कुल 723 मामले