हत्याकांड के तीन दोषियों को आजीवन कारावास

देवघर: जसीडीह के कुंडीकोला में शंकर प्रसाद यादव की गला रेत कर हत्या के मामले में दो हजार दिन बाद फैसला आया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दो कृष्ण कुमार की अदालत ने हत्या में दोषी पाये रुदनी देवी, कामदेव दास व राजेंद्र दास को सश्रम उम्रकैद की सजा सुनायी गयी. साथ ही प्रत्येक […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
देवघर: जसीडीह के कुंडीकोला में शंकर प्रसाद यादव की गला रेत कर हत्या के मामले में दो हजार दिन बाद फैसला आया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दो कृष्ण कुमार की अदालत ने हत्या में दोषी पाये रुदनी देवी, कामदेव दास व राजेंद्र दास को सश्रम उम्रकैद की सजा सुनायी गयी. साथ ही प्रत्येक दोषी को 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया.

यह राशि अदा नहीं करने पर छह माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी. भरी अदालत में यह फैसला सुनाया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय ने 12 गवाहों की कोर्ट में गवाही कराया व दोष सिद्ध करने में सफल हुए. बचाव पक्ष से अधिवक्ता फणिभूषण पांडेय व गोपल शर्मा ने पक्ष रखा.

यह मुकदमा चौकीदार बालकिशुन पासवान के बयान पर अज्ञात लोगों के विरुद्ध दर्ज हुआ था, लेकिन अनुसंधान के क्रम में आरोपितों का नाम इस घटना से जुड़ा व ट्रायल हुअा. कोर्ट ने मृतक की पत्नी को 50 हजार रुपये विक्टिम कंपनसेशन के तौर पर डालसा के माध्यम से देने का भी आदेश दिया.

19 मई 2012 को हुई थी घटना
जसीडीह थाना क्षेत्र के कुंडीकोला स्थित लिफ्ट एरिगेशन के कुआं से एक शव 19 मई 2012 को मिला था, जिसकी गला रेत कर हत्या कर दी गयी थी. इस घटना के संबंध में शंकरीगली गांव निवासी चौकीदार बालकिशुन पासवान के बयान पर जसीडीह थाना में अज्ञात अपराधकर्मियों के विरुद्ध एफआइआर संख्या 130/2012 दर्ज कर किया गया. बाद में मृतक की पहचान शंकर प्रसाद यादव के रुप में उनकी पत्नी मीना देवी ने की. वह सारवां थाना के दौंदिया गांव का रहनेवाला था व टीवी रिपेयर का काम घर-घर जाकर करता था. अनुसंधान में खुलासा हुआ कि टीवी मरम्मत के दौरान शंकर प्रसाद यादव की जान-पहचान सारवां के चरघरा गांव की रूदनी देवी से हुई. रूदनी देवी व कामदेव दास से जान-पहचान होने के चलते सहयोग के लिए 40 हजार रुपये लौटाने की बात कहकर लिया था. बाद में इसी पैसे को लेकर विवाद हुआ व आरोपितों ने जसीडीह थाना के बजरमरुआ गांव निवासी राजेंद्र दास के सहयोग गला रेतकर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद शव को लिफ्ट एरिगेशन के कूप में डाल दिया था.
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