एक पुलिया होती, तो हम आसानी से अस्पताल जा पाते

पालोजोरी : पालोजोरी बाजार से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित आदिवासी गांव सगराजोर स्कूल टोला आजादी के 70 साल बाद भी मुख्य सड़क से नहीं जुड़ पाया है. स्कूल टोला की आबादी करीब डेढ़ सौ है. यहां 16 आदिवासी परिवार के लोग रहते हैं. गांव को जोड़ने वाली कच्ची सड़क की हालत काफी […]

पालोजोरी : पालोजोरी बाजार से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित आदिवासी गांव सगराजोर स्कूल टोला आजादी के 70 साल बाद भी मुख्य सड़क से नहीं जुड़ पाया है. स्कूल टोला की आबादी करीब डेढ़ सौ है. यहां 16 आदिवासी परिवार के लोग रहते हैं. गांव को जोड़ने वाली कच्ची सड़क की हालत काफी खराब है. वहीं इस सड़क के बीच में बहने वाले दो बरसाती नालों के कारण बरसात के दिनों में गांव पूरी तरह से टापू में तब्दील हो जाता है. इन दिनों अगर गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल तक ले जाने के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. गांव में कोई भी चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाता है.

लोग बीमार व असहाय को डोली में लाद कर मुख्य सड़क तक लाते हैं. उसके बाद मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है. तब उसका इलाज होता है. गांव में स्कूल, ब्रांच पोस्ट ऑफिस, पंचायत सचिवालय भी हैं. स्कूल में आम चुनाव के लिए बूथ भी संचालित होता है. इसके बावजूद सड़क नहीं रहने से यहां के ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आलाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया है, लेकिन आज तक सड़क व पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया है. वहीं मनरेगा के तहत दो बार गांव से जोरो पहाड़ी तक सड़क पर मिट्टी भरने का कार्य हुआ है.

लोगों ने कहा कि अगर इस बरसाती नाले पर दो पुलिया बन जाएं तो उनकी जिंदगी आसान हो जायेगी. साथ ही लोगों ने यह भी कहा कि पुलिया तक सड़क को जोड़ने के लिए वे लोग अपनी जमाबंदी जमीन भी देने को तैयार हैं.

कहते हैं कृषि मंत्री

इस संबंध में सूबे के कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए गांव के बीच बरसाती नाले पर पुलिया का निर्माण करवाया जायेगा. इसके लिए गांव के लोगों को भी थोड़ा सहयोग करने की जरूरत है. पुलिया तक एप्रोच सड़क बनाने के लिए ग्रामीण को जमीन दान में देनी होगी.

कहते हैं ग्रामीण

गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है. सरकार अगर बरसाती नाले में पुलिया का निर्माण करवाती है तो वह पुलिया तक एप्रोच रोड के लिए अपनी जमाबंदी जमीन देने को तैयार हैं. सरकार को हर प्रकार से इस निर्माण कार्य में सहयोग करने को तैयार हैं.

– कष्टी किस्कू, ग्राम प्रधान

चुनाव के दौरान नेता भी बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उसके बाद सभी इसे भूल जाते हैं. सिर्फ दो पुलिया के अभाव में गांव बरसात के दिनों में टापू बन कर रह जाता है. सरकार को हम आदिवासियों की भी चिंता करनी चाहिए.

– प्रेमचन्द किस्कू

गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए एक भी सड़क नहीं है. वे लोग कई तरह की परेशानियों का सामना करते हुए बाजार पहुंचते हैं. सरकार को पुलिया व सड़क निर्माण की पहल करनी चाहिए.

– टू किस्कू

सबसे ज्यादा परेशानी वर्षा के दिनों में होती है. सड़क नहीं रहने के कारण ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सरकार को हम आदिवासियों के लिए भी कुछ करना चाहिए. बीमार व असहाय लोगों को डोली में बिठा कर ले जाना पड़ता है.

– चंद्रकांत किस्कू

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