देवघर: राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार त्रिकुट पहाड़ पर्यटकों के लिए काफी खास है. यहां राज्य का एकमात्र रोप-वे है. रोप-वे पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है. इससे पर्यटन विभाग को लाखों की आमदनी होती है. ठंड के दिनों में पूरा त्रिकुट पहाड़ व रोप-वे पर्यटकों से गुलजार हो जाता है. अगर त्रिकुट पहाड़ पर्यटन विभाग द्वारा सुविधा और बढ़ा दी जाये तो यह रोजगार का बड़ा केंद्र हो सकता है. लेकिन विभाग की उपेक्षा से त्रिकुट पहाड़ पर सुविधा व सुरक्षा का अभाव है.
सुविधाएं बढ़ी तो रोजगार का बड़ा केंद्र होगा त्रिकुट
देवघर: राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार त्रिकुट पहाड़ पर्यटकों के लिए काफी खास है. यहां राज्य का एकमात्र रोप-वे है. रोप-वे पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है. इससे पर्यटन विभाग को लाखों की आमदनी होती है. ठंड के दिनों में पूरा त्रिकुट पहाड़ व रोप-वे पर्यटकों से गुलजार हो जाता है. अगर त्रिकुट […]

वर्ष 2014 में खुले में शौच जाने के दौरान विद्युत तार की चपेट में अाकर पश्चिम बंगाल के एक पर्यटक की मौत हो गयी थी. इसके बाद पर्यटन विभाग से 2016 में 27 लाख की लागत से त्रिकुट पहाड़ के समीप बने शौचालय का उद्घाटन पर्यटन मंत्री अमर बाउरी ने किया था. उदघाटन तो हो गया, पर यह शौचालय अब तक चालू नहीं हो पाया. अभी भी पर्यटकों को खुले में शौच जाना पड़ता है. रोप-वे से पहाड़ के ऊपर जाने वाले पर्यटकों के लिए अलग से शौचालय की सुविधा नहीं है. शौचालय चालू नहीं होने पर महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने आपत्ति भी की थी.
त्रिकुट कॉम्प्लेक्स के घाटे में चलने की एक वजह सुरक्षा भी : त्रिकुट में पश्चिम बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों में पर्यटक पहुंचते हैं. त्रिकुट की प्राकृतिक खूबसूरती को नजदीक से निहारने के लिए यहां पर्यटन विभाग ने करोड़ों की लागत से पर्यटन कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया है. कॉम्प्लेक्स में वातानुकूलित कमरे व रेस्टोरेंट भी हैं, लेकिन सुरक्षा व बिजली के अभाव में पर्यटकों का यहां अधिक ठहराव नहीं होता है. जिस कंपनी को इसे संचालित करने का जिम्मा दिया गया है, उसके लिए भी घाटे का सौदा साबित हो रहा है.
लाखों की आकर्षक लाइट बर्बाद
त्रिकुट पहाड़ में बिजली की आपूर्ति अलग से नहीं है. ग्रामीण विद्युत आपूर्ति पर ही रोप-वे से लेकर त्रिकुट कॉम्प्लेक्स भवन समेत साजो-सज्जा में लगायी गयी आकर्षक लाइटें निर्भर है. पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की वजह से उद्घाटन के बाद से कभी भी रंग-बिरंगी लाइटें नहीं जली व फव्वारा भी बेकार हो गया. अब स्थिति है कि मेंटेनेंस के अभाव में लाइटें बर्बाद हो रही है. बिजली के अभाव में शाम होते ही त्रिकुट पहाड़ के ऊपर से नीचे तक अंधेरा पसर जाता है. पर्यटक असुरक्षा की वजह से शाम ढलने से पहले त्रिकुट से निकलने लगते हैं.
रेस्टोरेंट समेत कई योजनाएं अटकीं
त्रिकुट पहाड़ की चोटी पर पर्यटन विभाग ने रेस्टोरेंट, कैफिटेरिया, शेड, इको पार्क, बेरिकेटिंग समेत धार्मिक स्थलों को संरक्षित व सुसज्जित करने की योजना बनायी थी. पहाड़ की चोटी पर एक ऐसी दूरबिन का निर्माण करने की योजना थी, जिससे बाबा बैद्यनाथ मंदिर व बासुकिनाथ मंदिर का दर्शन किया जा सके. लेकिन वन विभाग से फोरेस्ट क्लीयरेंस का अडंगा आने के बाद पर्यटन विभाग की यह योजनाएं अटक गयी.
पहाड़ पर खतरेवाले स्थान में सुरक्षा नहीं
रोप-वे के जरिये पहाड़ की चोटी पर सैर-सपाटे के लिए पहुंचने वाले पर्यटक अक्सर सेल्फी लेने व फोटोग्राफी करने खतरे के स्थान पर पहुंच जाते हैं. इससे कई छोटी-मोटी गिरने की घटनाएं भी हो चुकी है. इन खतरे वाले स्थान पर कोई बेरिकेडिंग पर्यटन या वन विभाग की ओर से नहीं की गयी है. पहाड़ की चोटी पर स्थित शालीग्राम पत्थर तक सीढ़ी भी नहीं बनाया गया है.
फाइलों में दबा त्रिकुट थाना का प्रस्ताव
त्रिकुट पहाड़ में आने वाले पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट की अक्सर होती रही है. मोहनपुर थाने में कई बार केस भी दर्ज कराया गया है. नवंबर से फरवरी तक पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है, इस क्रम में कई बार पर्यटकों के साथ घटनाएं हो चुकी है. पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर हमेशा सवाल उठता रहा है. सुरक्षा के नाम पर केवल सावन पुलिस की प्रतिनियुक्ति रहती है. त्रिकुट में स्थायी थाना खोलने का प्रस्ताव देवघर एसपी द्वारा पुलिस मुख्यालय को भेजा गया है, लेकिन प्रस्ताव फाइलों में ही दबा है.
रोप-वे के दायरे में पर्यटकों के लिए शौचालय व पानी की सुविधा है. अगर पहाड़ के ऊपर व नीचे सुविधा बढ़ा दी जाये, तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है. त्रिकुट पहाड़ की चोटी पर रेस्टोरेंट, कैफिटेरिया, शेड समेत बिजली की पर्याप्त सुविधा जरूरी है. खतरे वाले स्थान पर सीढ़ी व बेरीकेडिंग समेत त्रिकुट पहाड़ में थाना का प्रस्ताव पर्यटन मंत्री व सचिव व निदेशक को दिया गया है. पहाड़ के नीचे शौचालय को अविलंब चालू करना चाहिए, इससे महिला पर्यटकों को काफी दिक्कत हो रही है.
– एमके वेग, प्रबंधक, त्रिकुट रोप-वे