मार्च 2018 तक चिह्नित हो जायेंगे बांग्लादेशी

देवघर: 31 मार्च 2018 तक देश में अवैध तरीके से घुसपैठ कर रह रहे बांग्लादेशी चिन्हित कर लिये जायेंगे. उसके बाद ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार अपेक्षित कार्रवाई की जायेगी. उक्त बातें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजु ने कही. श्री रिजीजु बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के संबंध में लोकसभा में शून्यकाल के […]

देवघर: 31 मार्च 2018 तक देश में अवैध तरीके से घुसपैठ कर रह रहे बांग्लादेशी चिन्हित कर लिये जायेंगे. उसके बाद ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार अपेक्षित कार्रवाई की जायेगी. उक्त बातें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजु ने कही. श्री रिजीजु बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के संबंध में लोकसभा में शून्यकाल के दौरान गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा उठाये गये मुद्दे पर जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि आधार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण देश के सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आधार नामांकन/अध्यतन करने का कार्य कर रहा है. आधार के विवरणों के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अद्यतन करने का कार्य सभी राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों (असम और मेघालय को छोड़कर) में किया गया है. यह काम मार्च 2018 तक पूरा कर लिया जायेगा.
घुसपैठिये कानूनन बाहर किये जायेंगे जायेगा : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि जो भी अवैध घुसपैठिये चिन्हित होंगे, सभी को भारत सरकार के कानून के मुताबिक बाहर भेजा जायेगा. इसके लिए सारी प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन तक आबादी, इस कारण दिक्कत : केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने अवैध अप्रवास/घुसपैठ रोकने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने, सीमावर्ती सड़कों का निर्माण करने, तेज रोशनी की व्यवस्था करने, नियमित गश्त करने, सूचना तंत्र को सुदृढ़ करने आदि जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं. लेकिन भारत बांग्लादेश सीमा पर व्यवहारिक कठिनाइयां हैं क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा छिद्रयुक्त व नदी मार्ग का है, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन तक आबादी है और जातीय समानताओं के मुद्दे आदि हैं. इस कारण कार्रवाई में परेशानी हो रही है.
साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा सहित बंगाल है प्रभावित : ज्ञात हो कि बाग्लांदेशी घुसपैठिये अवैध तरीके से भारत के सीमावर्ती इलाके से प्रवेश करके झारखंड के साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा सहित बंगाल के अधिकांश जिले में फैले हैं. ये सुनियोजित तरीके से इलाके में घुसते हैं और तिकड़म के तहत यहां के नागरिक बन रह रहे हैं.

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