इसके बंद होने से 8476 प्रेरकों के रोजगार के छिन जाने की आशंका है. इसमें देवघर जिले के 194 पंचायतों के 399 साक्षरता कर्मी शामिल हैं. इससे उनके सामने परिवार चलाने की मुश्किल खड़ी हो जायेगी. राज्य के 45 लाख निरक्षरों को साक्षर करने के लिए सरकार ने नौ सितंबर 2012 को साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम की शुरुआत की थी. साक्षरता कर्मियों की नियुक्ति कर निरक्षरों को साक्षर बनाने का कार्य किया जा रहा था, लेकिन लक्ष्य से काफी पीछे रहने के कारण कार्यक्रम को छह माह के लिए विस्तार दिया गया था.
बता दें कि इसी साल 25 मई को राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने निर्देश जारी कर राज्य में महिला साक्षरता दर को पुुरुषों की साक्षरता दर के अनुपात में लाने के लिए वर्ष 2019 तक 34 लाख निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा था. इस योजना के बंद होने से न सिर्फ साक्षरता मिशन पर असर पड़ेगा, बल्कि 4103 पंचायतों में चल रहे लोक शिक्षा केंद्र व पुस्तकालयों का संचालन भी बंद हो जायेगा. वर्ष में दो बार नवसाक्षरों की बुनियादी परीक्षा भी नहीं ली जा सकेगी.
