देवघर में दो वर्ष से पर्यटन पदाधिकारी का पद है खाली, अनुसेवक पर आश्रित पर्यटन कार्यालय

देवघर : राज्य की सांस्कृतिक राजधानी व पर्यटन के मुख्य केंद्र देवघर में पर्यटन विभाग अनुसेवक पर आश्रित है. दो वर्षों देवघर में पर्यटन पदाधिकारी का पद खाली है. पर्यटन कार्यालय में दो अनुसेवक हैं, इसमें शिबू राम व गायत्री देवी हैं. दोनों ऑफिस के काम-काज से लेकर पत्र तक जवाब खुद देते हैं. आश्चर्य […]

देवघर : राज्य की सांस्कृतिक राजधानी व पर्यटन के मुख्य केंद्र देवघर में पर्यटन विभाग अनुसेवक पर आश्रित है. दो वर्षों देवघर में पर्यटन पदाधिकारी का पद खाली है. पर्यटन कार्यालय में दो अनुसेवक हैं, इसमें शिबू राम व गायत्री देवी हैं. दोनों ऑफिस के काम-काज से लेकर पत्र तक जवाब खुद देते हैं. आश्चर्य की बात है कि जिस देवघर में प्रति वर्ष लाखों की संख्या में धार्मिक व पर्यटन के दृष्टिकोण से लोग आते हैं, वहां पर्यटन विभाग चलाने के लिए एक पदाधिकारी तक नहीं है.

ऐसी परिस्थिति में पर्यटन स्थलों की मॉनीटरिंग, रखरखाव व विकास से संबंधित कार्य कैसे होंगे, यह अहम सवाल है. देवघर के प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों में बाबा बैद्यनाथ मंदिर, त्रिकुट पहाड़, तपोवन, हरिलाजोड़ी, बुढ़ैय पर्वत, नंदन पहाड़, तुतरा पहाड़ी आदि हैं. इन पर्यटन व धार्मिक स्थलों पर बाहर से आने वाले लोग कैसे जायेंगे, कहां ठहरने व भ्रमण करने की व्यवस्था है, इसकी जानकारी देने के लिए पर्याप्त सूचना केंद्र तक नहीं है. प्राइवेट बस स्टैंड के समीप एकमात्र पर्यटन सूचना केंद्र भी पर्यटन मंत्रालय ने एक प्राइवेट एजेंसी को दे दिया है. पर्यटन के क्षेत्र क्या-क्या कार्य हो रहा है, इसकी कोई समीक्षा व मॉनीटरिंग पदाधिकारी के अभाव में नहीं हो रही है.

जनसंवाद में पदाधिकारी के बदले अनुसेवक ने दिया जवाब : पिछले दिनों मुख्यमंत्री जन संवाद में त्रिकुट पहाड़ में पेयजलापूर्ति योजना में कार्यरत कर्मियों को वेतन नहीं देने की शिकायत दर्ज हुई थी. इस मामले में जन संवाद के नोडल पदाधिकारी ने पर्यटन पदाधिकारी से जवाब मांगा कि कर्मियों का वेतन क्यों भुगतान नहीं किया गया है, लेकिन देवघर में पर्यटन पदाधिकारी नहीं रहने की वजह से पर्यटन कार्यालय के अनुसेवक शिबू राम ने ही पदाधिकारी के बदले हस्ताक्षर कर जवाब दे दिया. अनुसेवक ने अपने जवाब में कहा है कि त्रिकुट पहाड़ के इन कर्मियों के बकाया वेतन का मामला पर्यटन कार्यालय से नहीं, बल्कि पीएचइडी से जुड़ा है. अनुसेवक द्वारा भेजे गये इस जवाब के बाद जिले के अन्य पदाधिकारी भी अचरज में है कि आखिर अनुसेवक कैसे पूरा कार्यालय चला रहे हैं.
पर्यटकों को सूचना कराते हैं मुहैया
अनुसेवक शिबू राम कहते हैं कि पूर्व पर्यटन पदाधिकारी के रिटायर्ड होने के बाद वे करीब डेढ़ वर्ष से ऑफिस में पर्यटकों को केवल जिले के पर्यटन स्थलों की सूचना मुहैया कराते हैं. शेष अन्य कोई कार्य उनके जिम्मे नहीं है.
पर्यटन संबंधित योजना का कार्य जिला योजना पदाधिकारी के जिम्मे रहता है. पदाधिकारियों का अभाव है. पर्यटन पदाधिकारी का पद खाली है, तो अन्य पदाधिकारी को प्रभार सौंपा जायेगा. वैसे पर्यटन कार्यालय में कोई चपरासी नहीं, बल्कि केयर टेकर रहते हैं.
– राहुल कुमार सिन्हा, डीसी, देवघर

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