देवघर के दोआब क्षेत्र देवीपुर में बदलाव की बयार बह रही है. सुदूर गांव का सरकारी स्कूल, जिसके बारे में आम धारणा है कि यहां नाम की पढ़ाई होती है, उस स्कूल की बच्चियां अब इंटरनेट की बात करती हैं. उनकी अंगुलियां की-बोर्ड पर फर्राटे से चलती हैं. वे तकनीकी रूप से दक्ष हो रही हैं और गांव के हालात बदलने का माद्दा रखती हैं. बच्चियां अपने पिता को तकनीकी खेती व दुकानदारी में न सिर्फ सहयोग कर रही हैं, बल्कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर सुनहरे भविष्य का सपना गढ़ रही हैं. यह सब डिजिटल इंडिया से संभव हुआ है.
देवघर: एम्स के कारण चर्चा में रहा देवीपुर का क्षेत्र डिजिटल इंडिया के क्रियान्वयन में तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिस प्रखंड के सुदूर गांव की लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी, आज डिजिटल इंडिया की ही देन है कि अभिभावक जागरूक हो रहे हैं और अपने बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी बेहतर शिक्षा दे रहे हैं. अब देवीपुर जैसे दोआब क्षेत्र की बेटियां पूरी गंभीरता से कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. उन्हें यह सुविधा सरकारी स्कूल में ही मिल रही है. देवीपुर स्थित केंदुआ प्लस टू उत्क्रमित उच्च विद्यालय में एक हाइटेक कंप्यूटर लैब बना है. जहां डिजिटल क्लासेस के अलावा उन्हें कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है. एक सरकारी स्कूल इस दोआब क्षेत्र में डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में अपनी भूमिका निभा रहा है.
पीएमजी दिशा में किया गया है 291 छात्रों का चयन : कंप्यूटर शिक्षक पंकज शर्मा ने बताया कि इस स्कूल में बच्चे कंप्यूटर शिक्षा के प्रति काफी गंभीर हैं. उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि देवीपुर के इस स्कूल के 291 छात्रों का चयन प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता अभियान के लिए हुआ है. इन्हें अब और बेहतर शिक्षा सरकार की ओर से दी जायेगी.
एक क्लिक पर दुनिया जानने की चाह
इस हाइटेक लैब में स्टूडेंट काफी उत्सुकता से इंटरनेट ब्राउज कर रहे हैं. तकरीबन 100 स्टूडेंट्स इस लैब में कंप्यूटर शिक्षा पा रहे हैं. इसमें 45 लड़कियां हैं. ये लड़कियां एक क्लिक पर देश-दुनिया को जानने की चाह रखती है. बिंदास अंदाज में कंप्यूटर के बारे में, इंटरनेट ब्राउजिंग के बारे में, डिजिटल इंडिया के फायदे के बारे में दूसरों को बताती हैं. ये यहां जो कुछ भी सीखती हैं उसके फायदे से अपने परिजनों को भी जागरूक कर रही हैं.
