प्रभारी प्राचार्य के भरोसे 13 में से 12 कॉलेज

दुमका: सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के 13 अंगीभूत महाविद्यालयों में से 12 में प्राचार्य के पद रिक्त पड़े हुए हैं. केवल एक ही कॉलेज ऐसा है, जहां प्राचार्य नियुक्त हैं. वह कॉलेज है साहिबगंज कॉलेज साहिबगंज. वहां प्राचार्य के रूप में डॉ सिकंदर प्रसाद यादव पदस्थापित हैं. महाविद्यालयों के लिए प्राचार्य की नियुक्ति राज्य लोक […]

दुमका: सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के 13 अंगीभूत महाविद्यालयों में से 12 में प्राचार्य के पद रिक्त पड़े हुए हैं. केवल एक ही कॉलेज ऐसा है, जहां प्राचार्य नियुक्त हैं. वह कॉलेज है साहिबगंज कॉलेज साहिबगंज. वहां प्राचार्य के रूप में डॉ सिकंदर प्रसाद यादव पदस्थापित हैं. महाविद्यालयों के लिए प्राचार्य की नियुक्ति राज्य लोक सेवा आयोग ही करता है. लंबे समय से नियुक्ति की प्रक्रिया को मूर्त रूप नहीं देने की वजह से प्राचार्य रिटायर होते गये और पद खाली होता गया.
कामकाज और संस्थान का प्रबंधन प्रभावित
प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने से विश्वविद्यालय के स्तर से किसी शिक्षक को ही प्रोफेसर इंचार्ज बनाये जाने की परंपरा रही है. यह वैकल्पिक व्यवस्था कई बार बहुत कारगर साबित नहीं हुई है. यही वजह है कि विश्वविद्यालय किसी को प्रभारी बनाता भी है, तो वह ज्यादा दिनों तक वहां टिके नहीं रहता और नये चेहरे को लाकर उन्हें बैठा दिया जाता है. कुछ कॉलेज ऐसे भी हैं, जहां साल भर में दो-तीन प्राचार्य दिख गये.
कार्यकारी व्यवस्था स्थायी विकल्प नहीं
इस संदर्भ में प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने कहा कि कार्यकारी व्यवस्था स्थायी का विकल्प नहीं हो सकता, लेकिन इसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि कई प्रभारी प्राचार्य बेहतर अच्छे ढंग से कॉलेज का प्रबंधन कर रहे हैं. प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता की वजह से उनका विजन कॉलेज के शैक्षणिक वातावरण में दिखता है. कुछ का कार्य उस अनुरूप संतोषजनक नहीं है. ऐसे ही प्रभारी को हटाना पड़ता है, जो उस उम्मीद पर खरे नहीं उतर पाते. जो अच्छा कर रहे हैं, उन्हें हटाने की जरूरत ही नहीं पड़ती.

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