बाजार में रही रौनक, खूब बिके सेवई लच्छे, इत्र, कपड़े व टोपी
मधुपुर : ईद उल जोहा यानी बकरीद का दिन ही ऐसा दिन है, जिस दिन अल्लाह के राह में सबसे अजीज चीज की कुर्बानी दी जाती है. इस दिन एक बाप ने अपने बेटे की अल्लाह की राह में कुर्बानी दे दी थी. मौलाना अजमल नूरी ने कहा कि हजरत इब्राहिम अलेहिस्सलाम को 90 वर्ष […]
मधुपुर : ईद उल जोहा यानी बकरीद का दिन ही ऐसा दिन है, जिस दिन अल्लाह के राह में सबसे अजीज चीज की कुर्बानी दी जाती है. इस दिन एक बाप ने अपने बेटे की अल्लाह की राह में कुर्बानी दे दी थी. मौलाना अजमल नूरी ने कहा कि हजरत इब्राहिम अलेहिस्सलाम को 90 वर्ष की उम्र मे हजरत इसमाइल अलेहिस्मलाम के रूप में एक औलाद प्राप्त हुआ था.
पुत्र को बुढ़ापे का सहारा माना जाता है, लेकिन उन्हें बुढ़ापे में बड़ी ही दुआ व मन्नतों के बाद जन्मे हजरत इस्माइल अलेहिस्सलाम को कुर्बानी देने का फरमान अल्लाह ताला ने हजरत इब्राहिम को तीन रात लगातार ख्वाब में दिया. इब्राहिम को अपने सबसे अजीज चीज की कुर्बानी पेश करने का हुकूम मिला. हजरत इब्राहिम के अनुसार अगर सबसे अजीज चीज थी तो वो उनका पुत्र इस्माइल था. उन्होंने खुदा के फरमान को पूरा करने के लिए अपने पुत्र की कुर्बानी दे दी. तब से लेकर आज कुर्बानी की प्रथा चली आ रही है. इस दिन से लोग अपने अकीदत के साथ बकराें की कुर्बानी देते आ रहे हैं.
ऊंची कीमत पर बिके बकरे
बकरीद में परंपरागत तरीके से बकरा की कुर्बानी दी जायेगी. तीन दिनों तक कुर्बानी दिये जाने का रिवाज चला आ रहा है. बकरे की बिक्री भी बाजार में खूब रही. इस बार अधिकतम 25 हजार में एक बकरा बिका, जो चर्चा का विषय बना रहा. वैसे, बकरीद में बकरों की बोली भी काफी लगी रही.
अपने क्रोध की कुर्बानी दे इंसान: मो रियासत
सारवां. मौलाना रियासत अंसारी ने लोगों से कहा कि इंसान को सबसे पहले अपने क्रोध की कुर्बानी देनी चाहिए. इसलाम में एक सच्चे मुसलमान के लिए शराब को हाथ लगाना भी हराम माना जाता है. शराब से हिंसा व अपराध बढ़ता है. इससे तौबा करें तभी मोहम्मद साहब का सपना साकार होगा. कहा कि बकरे की कुर्बानी तो आम बात है, ये परंपरा है लेकिन केवल इससे कर्तव्यों की समाप्ति नहीं हो जाती है. आज हालात इतने बदल गये हैं कि लोग एक दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं. जब तक सामाजिक व्यवस्था जीवित नहीं रहेगी, अपराध व अपराधियों पर अंकुश नहीं लग सकेगा.