देवघर: जापानी इंसेफेलाइटिस पर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है. वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन सोसाइटी द्वारा इस बीमारी को लेकर जिले की सभी सहिया व स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया. कहा गया है कि इस रोग के लक्षण दिखाई देने पर सहिया को संभावित मरीजों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना है. इस बीमारी में अगर समय पर रोगी का इलाज नहीं हुआ तो जान भी जा सकती है.
क्या है जापानी इनसेफेलाइटिस : जापानीज इनसेफेलाइटिस एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फैलता है. यह मस्तिष्क ज्वर के नाम से भी जाना जाता है. वातावरण में जेइ का वायरस पानी वाले पक्षी और कुछ पशुओं में हमेशा बना रहता है. यह बीमारी वैसे क्षेत्रों में होता है, जहां पशु, पक्षी व मानव साथ-साथ रहते हैं. संक्रमित सूअर से यह बीमारी तेजी से फैलता है. इसके प्रमुख लक्षण सिरदर्द के साथ तेज बुखार, बेहोशी, कंपन, उल्टी आना, मिरगी के लक्षण व शारीरिक क्रियाओं में समन्वय का अभाव है.
क्या है इससे बचाव के उपाय
घर के आसपास साफ-सफाई व सूखा रखें. स्थिर जल-जमाव वाले क्षेत्रों को भर दें. खुली नालियों को साफ रखें व उसके पानी स्थिर नहीं होने दें. सोते समय लोग अवश्य मच्छरदानी का प्रयोग करें. साथ ही पूरे शरीर ढ़कने वाले कपड़े पहनें. धान के खेत में नीम के सूखे पत्ते डालें ताकि मच्छरों को पनपने से रोका जा सके. संभव हो तो धान के खेतों लार्वाभक्षी मछली गम्बूशिया-गप्पी डालें. मच्छरों से बचाव के लिये खिड़कियों में जाली लगवाएं और मच्छररोधी लिक्विड मैट, अगरबत्ती आदि का प्रयोग करें.
