इससे पर्यावरण को नुकसान के साथ विभिन्न बीमारियों काे आमंत्रित कर रहा है. प्रदूषण जांच की व्यवस्था नहीं होने से परिवहन विभाग को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है. लगातार शिकायत मिलने के बाद भी विभाग वाहनों के प्रदूषण जांच को लेकर गंभीर नहीं है. केंद्रीय मोटर यान नियम, 1989 के नियम 115(7) के प्रावधानों को लागू करने का मतलब था कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित व प्रदूषण जांच केंद्रों को प्राधिकृत करना. उनके कार्य संचालन की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए कई योजना बनायी गयी, लेकिन शत-प्रतिशत धरातल पर नहीं उतर पायी. नतीजा आज लोगों को वाहनों के शोर-गुल से परेशानी होने लगी है.
अनदेखी: वाहनों के प्रदूषण जांच का नहीं है इंतजाम, धड़ल्ले से चल रहे पुराने व खटारा वाहन, लोगों को बीमार कर रहा जहरीला धुआं
देवघर : देवघर में धड़ल्ले से पुराने व खटारा वाहनों काे चलाया जा रहा है. ये वाहन जहरीला धुआं छोड़ रहे हैं, जाे वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं. इससे लाेगाें को सांस की बीमारी हो रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह देवघर में प्रदूषण जांच की सुविधा का नहीं हाेना है. देवघर की सड़कों […]

देवघर : देवघर में धड़ल्ले से पुराने व खटारा वाहनों काे चलाया जा रहा है. ये वाहन जहरीला धुआं छोड़ रहे हैं, जाे वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं. इससे लाेगाें को सांस की बीमारी हो रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह देवघर में प्रदूषण जांच की सुविधा का नहीं हाेना है.
देवघर की सड़कों पर 1.33 लाख से ज्यादा टू व्हीलर, कार, जीप, टैक्सी, थ्री व्हीलर, ट्रैक्टर, ट्रेलर, ट्रक, बस का लाेड है. मेंटनेंस के अभाव में देवघर में निजी व कॉमर्शियल वाहनों से बेतरतीब प्रदूषण फैल रहा है. इन वाहनों के प्रदूषण की जांच का इंतजाम देवघर में नहीं है. संताल परगना प्रमंडल में सिर्फ दुमका जिले में वाहनों के प्रदूषण की जांच होती है. ऐसे में अधिकांश वाहन चालक दूरी के अभाव में वाहनों के प्रदूषण की जांच नहीं कराते हैं.
ध्वनि प्रदूषण से हो रहे हैं अनिंद्रा के शिकार : वैज्ञानिक प्रगति के कारण मोटर गाड़ियों, दो पहिया व तीन पहिया वाहनों में तीव्र हॉर्न का प्रचलन जोर पकड़ लिया है. मनुष्य की श्रवण क्षमता 80 डेसिबल होती है. 25 डेसिबल पर शांति का वातावरण होता है. 80 डेसिबल से अधिक शोर होने पर मनुष्य में अस्वस्थता आ जाती है, या बेचैनी होने लगती है. 130-140 डेसिबल का शोर अत्यंत पीड़ादायक होता है. इससे अधिक शोर होने पर मनुष्य में बहरा होने का खतरा होता है. ध्वनि प्रदूषण के कारण व्यक्ति अनिद्रा, सिरदर्द, थकान, हृदय रोग, रक्तचाप आदि का शिकार हो जाता है. किसी व्यक्ति के लगातार आठ घंटे तक 80-90 डेसिबल की ध्वनि में रहने से उसमें बहरापन शुरू हो जाता है.
वायु प्रदूषण से बीमारी का खतरा
वाहनों में डीजल, पेट्रोल, मिट्टी का तेल आदि के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, अदग्ध हाइड्रोकार्बन, सीसा व अन्य विषैली गैस वायु में मिलकर उसे प्रदूषित करती हैं. विषैले पदार्थ वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं. इससे मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. बीमारी का खतरा बना रहता है.
कहती हैं डीटीओ
वाहनों के प्रदूषण का जांच अनिवार्य है. बगैर प्रदूषण की जांच कराये वाहनों का परिचालन करने वालों से दंड वसुलने का प्रावधान है. देवघर में प्रदूषण जांच के लिए कोई केंद्र नहीं है. दुमका के अलावा गिरिडीह व धनबाद से प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र ले सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति प्रदूषण जांच केंद्र खोलना चाहता है तो विभाग उसे मदद करेगा.
– प्रेमलता मुर्मू , जिला परिवहन पदाधिकारी देवघर.