आम-केले की खेती में 26 लाख बरबाद

योजना का सच . पौधे लगाकर गिना दी उपलब्धि, देखभाल नहीं होने से फसल चौपट तीन वर्षों में योजनाओं का बुरा हाल बगैर प्रशिक्षण दिये किसानों को दे दिये पौधा लाखों खर्च के बाद भी आम व केला की खेती फ्लॉप देवघर : जिला उद्यान कार्यालय से संचालित उद्यान की योजनाएं मॉनिटरिंग के अभाव में […]

योजना का सच . पौधे लगाकर गिना दी उपलब्धि, देखभाल नहीं होने से फसल चौपट

तीन वर्षों में योजनाओं का बुरा हाल
बगैर प्रशिक्षण दिये किसानों को दे दिये पौधा
लाखों खर्च के बाद भी आम व केला की खेती फ्लॉप
देवघर : जिला उद्यान कार्यालय से संचालित उद्यान की योजनाएं मॉनिटरिंग के अभाव में चौपट हो रही है. पिछले तीन वर्षों में उद्यान विभाग में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत संचालित लगभग 26 लाख की आम, केला व सपाटू की खेती की योजनाएं फ्लॉप हो गयी. वित्तीय वर्ष 2015-16 में बागवानी मिशन से तीन प्रखंडों में 15 लाख रुपये खर्च कर 45 हजार केला के पौधे लगाये गये, इसमें 20 फीसदी पौधे भी नहीं बच पाये हैं. यही स्थिति आम व सपाटू के पौधों की भी है.
वित्तीय वर्ष 2016-17 में करीब 11 लाख की लागत से मधुपुर प्रखंड के पांच गांव में आम व सपाटू के पौधे लगाये गये. एक साल के दौरान 10 फीसदी पौधे भी नहीं बचे हैं. इन दोनों योजनाओं में किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर विभाग द्वारा पौधा, खाद व बीज मुहैया गया है, शेष खेती कार्य जैसे खुदाई, सिंचाई व पौधों की सुरक्षा किसानों की जिम्मेवारी थी.
सिंचाई के अभाव में नष्ट हुए पौधे
आम, सपाटू व केला का पौधा तो मुहैया कराया गया, लेकिन किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं दी गयी. हालांकि विभाग ने किसानों को बूंद-बूद सिंचाई के लिए ड्रिप पाइप तो मुहैया, लेकिन किसान पानी कहां से लायेंगे, इसकी कोई व्यवस्था नहीं की गयी. ड्रिप पाइप अब भी इन गांवों में बेकार पड़ा हुआ है.पानी के अभाव में पौधे नष्ट हो गये.
मधुपुर के इन गांवों में हुई थी आम व सपाटू की खेती
वित्तीय वर्ष 16-17 में मधुपुर प्रखंड के पटवाबाद, झुनका, पहाड़पुर, राजा भिट्टा, गुंदलीडीह में 150 हेक्टेयर भूमि में आम व सपाटू की खेती की योजना शुरू हुई थी. यहां पौधा लगाने की जिम्मेवारी एग्रीटेक मार्क्स व अलका जागृति ट्रस्ट संस्था को दी गयी थी. कुल 11 लाख रुपये में इसमें अम्रपाली, मालद, बंबइर्या आम समेत विभिन्न प्रभेद के सपाटू के पौधे लगाये गये थे. 50 फीसदी अनुदान में विभाग द्वारा 76.50 रुपये की लागत से 35 पौधा किसानों को मुहैया कराया गया था,
प्रति हेक्टेयर भूमि में 7650 रुपये खर्च किये गये थे. इसके साथ ही खाद व खली भी विभाग ने मुहैया करायी थी. शेष अंशादन किसानों का खुदाई से लेकर सिंचाई तक थी. हालांकि विभाग ने इस योजना में केवल सपहा गांव में करीब 10 लाख की लागत से सोलर पम्प सिंचाई की सुविधा मुहैया करायी, शेष गांव में सिंचाई की कोई सुविधा नहीं रहने से 80 फीसदी पौधे नष्ट हो गये.
राष्ट्रीय बागवानी मिशन तीन वर्ष की योजना है, जो पौधे नष्ट हुए हैं, उन स्थानों पर प्रावधान के अनुसार गैप फिलिंग के तहत पुन: पौधा लगाना है. आम व सपाटू का पौधा पुन: लगाने के लिए संबंधित एनजीओ निर्देश दिया जायेगा. केला की खेती की योजना मेरे कार्यकाल से पहले की है, बावजूद इसकी जांच करायी जायेगी. इस योजना में किसानों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान नहीं था.
– ओमप्रकाश चौधरी, प्रभारी डीएचओ, देवघर
केले की खेती से जुड़े थे 42 किसान
वित्तीय वर्ष 15-16 में केला की खेती देवघर प्रखंड के खोरीपानन, मारगोमुंडा प्रखंड के बरमसिया व मोहनपुर प्रखंड नवाडीह के 42 किसानों को जोड़ कर शुरू किया गया था. कुल 20 हेक्टेयर भूमि में 30 लाख रुपये योजना का बजट था. इसमें 50 फीसदी अनुदान में 15 लाख रुपये विभाग ने खर्च किया व शेष 50 फीसदी में किसानों का अंशदान खुदाई से लेकर सिंचाई तक था.

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