विडंबना: कोई नहीं लेना चाहता सिक्का, आरबीआइ का आदेश भी बेअसर, सिक्कों की खन-खन से आम से खास तक सभी परेशान

देवघर: देवघर सहित पूरे संताल परगना के छह जिले में सिक्के की खन-खन से आम और खास सब परेशान हैं. ये सिक्के बैंकों के लिए भी आफत बन गये हैं. ये सिक्का चाहे लोगों की जेब में हो या व्यापारियों या दुकानदारों के गल्ले में हो या बैंकों के कैश सेफ में हो, सभी जगह […]

देवघर: देवघर सहित पूरे संताल परगना के छह जिले में सिक्के की खन-खन से आम और खास सब परेशान हैं. ये सिक्के बैंकों के लिए भी आफत बन गये हैं. ये सिक्का चाहे लोगों की जेब में हो या व्यापारियों या दुकानदारों के गल्ले में हो या बैंकों के कैश सेफ में हो, सभी जगह सिक्कों की खन-खन आफत में डाले हुए है. सिक्के कोई नहीं लेना चाहता. फुटपाथ दुकानदारों से हर दिन लोगों की किच-किच होती है.

सिक्के नहीं चलने को लेकर भ्रांतियां फैलायी गयी है. इसमें दोष किसी एक का नहीं है. बाजार में रिटेलर से लेकर होलसेलर तक सिक्के नहीं लेना चाहते. इनका कहना है कि बैंक इनसे सिक्के नहीं लेता, इस कारण सिक्के का स्टॉक हो गया है. वहीं बैंकों के सामने विकट स्थिति है कि ये स्टॉफ की कमी का रोना रोते हैं. सिक्कों की गिनती कौन करेगा? एसबीआइ सहित कई बैंक सिक्का ले भी रहे हैं और जब ये किसी ग्राहक को देते हैं तो ग्राहक भी लेना नहीं चाहता. अब सवाल है कि यदि सिक्के का लेन-देन रेगूलर नहीं होगा, प्रचलन में नहीं रहेगा तो भला ये सिक्के कैसे चलेंगे.
एसबीआइ आपने ग्राहकों को देता है सिक्के : एसबीआइ मुख्य शाखा में सिक्के जमा लिया जा रहा है तथा बैंक अपने ग्राहकों को भी सिक्के दे रहा है. वहीं कैश काउंटर पर जब ग्राहक सिक्के लेने से इनकार करते हैं तो बैंक अफसर कहते हैं कि जब बैंक सिक्के ले रहा है तो ग्राहकों को भी लेना चाहिए. कोई परेशानी नहीं है. लेकिन आरबीआइ के निर्देश के बाद भी एसबीआइ के ही कई शाखा और अन्य बैंकों की शाखाओं में सिक्के नहीं लिये जा रहे हैं. ऐसी शिकायतें मिल रही है. लेकिन ये शिकायतें लिखित रूप से न थाने में पहुंचती है और न ही जिला प्रशासन या बैंकों को उच्चाधिकारियों के पास.
आरबीआइ के निर्देश का भी नहीं होता अनुपालन
आम लोग हों या खास (दुकानदार, व्यवसायी सहित) हों या बैंक प्राय: सभी सिक्के लेने से हिचकते हैं. सबके अपने-अपने तर्क हैं, अपना-अपना कारण है. इन लोगों पर आरबीआइ के निर्देश भी बेअसर है. आरबीआइ ने विज्ञापन प्रकाशित करवा कर सख्त निर्देश दिया था कि जो लोग भी एक, दो, पांच और 10 के सिक्के नहीं लेंगे, उनके खिलाफ लोग शिकायत करें, कानूनी कार्रवाई होगी. सभी तरह से सिक्के प्रचलन में हैं. आरबीआइ का यह निर्देश बैंकों पर भी लागू होता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा परेशानी है.
क्या कहते हैं अधिवक्ता
सभी को बैंक व ग्राहकों को आरबीआइ के गाइलाइन का पालन करते हुए सिक्कों का लेन-देन करना चाहिए. ऐसा नहीं करने वालों पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है. इसके लिए ग्राहक या व्यवसायी शिकायत देकर कानून का सहारा ले सकते हैं
अशोक राय, अधिवक्ता, देवघर
कहते हैं ग्राहक
एक बैंक अधिकारी ने व्हाट्सअप पर मैसेज भेजकर नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सभी दुकानदार व व्यापारी एक रुपये का सिक्का नहीं ले रहे हैं. बैंकर के रूप हम लोग बैंकों में सिक्का लेने के लिए बाध्य हैं. वहीं जब हम ग्राहक बनकर बाजार जाते हैं तो सिक्के कोई नहीं लेता. ऐसे में बहुत परेशानी होती है. इसका निराकरण होना चाहिए.
कहते हैं बैंक अधिकारी
सिक्के लेन-देन दोनों जरूरी है. इसमें कहीं से कोई रोक-टोक नहीं है. बैंक आरबीआइ के गाइड लाइन का अनुपालन करता है. कहीं से कोई शिकायत मिले, कोई बैंक नहीं ले तो पहले लोग बैंक के मैनेजर से मिलें, अपनी बात रखें, फिर भी काम नहीं होता है तो वरीय बैंक अधिकारी तक लिखित शिकायत करें.
परेश चंद्र बारीक, डीजीएम, एसबीआइ देवघर जोन

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