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बदहाल शिक्षा व्यवस्था. आठवीं के शिक्षक लेते हैं 11 वीं व 12 की छात्राओं की कक्षा करोड़ों खर्च के बावजूद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं दिख रहा है. कमोवेश यही हाल जिले भर के केजीवीए स्कूलों का है. विषयवार शिक्षक नहीं रहने के कारण बच्चियां नामांकन से कतरा रही हैं. देवघर : […]

बदहाल शिक्षा व्यवस्था. आठवीं के शिक्षक लेते हैं 11 वीं व 12 की छात्राओं की कक्षा

करोड़ों खर्च के बावजूद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं दिख रहा है. कमोवेश यही हाल जिले भर के केजीवीए स्कूलों का है. विषयवार शिक्षक नहीं रहने के कारण बच्चियां नामांकन से कतरा रही हैं.
देवघर : केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से जिले के आठ प्रखंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय का संचालन हो रहा है. इसका मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण परिवेश की लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना था. विभिन्न प्रखंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय खुले हुए एक दशक से ज्यादा हो गया. शैक्षणिक सत्र 15-16 से इंटरमीडिएट की पढ़ाई भी आरंभ कर दी गयी है. लेकिन, इंटरमीडिएट (11वीं एवं 12वीं) की पढ़ाई के लिए शिक्षक नहीं हैं.
नतीजा चालू शैक्षणिक सत्र में छात्राएं दाखिले से कतराने लगी हैं. पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में कक्षा दसवीं तक के पार्ट टाइम शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की गयीं. विद्यालय में नामांकित छात्राओं द्वारा कई बार इस व्यवस्था पर रोष भी प्रकट किया गया है.
केवल मिला आश्वासन, नहीं नियुक्त हुए शिक्षक: विभागीय पदाधिकारी भी शिक्षक उपलब्ध कराने का आश्वासन दे चुके हैं. लेकिन, विडंबना है कि आज तक इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए शिक्षक का इंतजाम नहीं किया गया है. सूत्रों की माने तो कक्षा दशम तक की पढ़ाई के लिए विद्यालय कैंपस में कार्यरत पार्ट टाइम शिक्षकों के भरोसे ही इंटरमीडिएट की कक्षाएं संचालित करायी जाती हैं.
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग झारखंड द्वारा पूर्व में ही शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया जा चुका है.
विषयवार शिक्षक नहीं होने के कारण माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई सिलेबस के अनुरूप नहीं हो रही है. पिछले दो शैक्षणिक सत्रों पर गौर करें तो कई विद्यालयों की इंटरमीडिएट की छात्राएं स्कूल कैंपस छोड़ माता-पिता के साथ घर पर रह कर प्राइवेट ट्यूटशन के सहारे सिलेबस पूरा कर परीक्षा में सफलता प्राप्त कर रही हैं.
जिले के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का बुरा हाल
विभागीय निर्देश के बाद भी अब तक नहीं हुई विषयवार शिक्षकों की बहाली
कक्षा छह से आठ तक में भी विषयवार शिक्षक नहीं
पार्ट टाइम शिक्षकों के भरोसे होती है 10वीं की पढ़ाई
शैक्षणिक सत्र 15-16 में शुरू हुई थी इंटरमीडिएट की पढ़ाई
जिले में आठ प्रखंडों में चल रहा है कस्तूरबा गांधी विद्यालय
कक्षा छह से 12वीं तक में दाखिले के लिए है निर्धारित 2400 सीटें
अब विद्यालय में दाखिले से कतरा रहीं छात्राएं
इंटरमीडिएट प्रथम व द्वितीय वर्ष में नामांकित छात्राएं :
प्रखंड प्रथम वर्ष द्वितीय वर्ष
देवघर 15 36
देवीपुर 18 14
करौं 29 37
मधुपुर 41 28
मोहनपुर 17 31
पालोजोरी 42 21
सारठ 41 29
सारवां 29 24
कहती हैं वार्डन
इंटर की पढ़ाई के लिए विद्यालय में दो शिक्षक प्रतिनियुक्त किये गए हैं व तीन पार्ट टाइमर शिक्षक हैं. हिंदी, रसायनशास्त्र, भौतिकी व जीव विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं.
शोभा कुमारी, वार्डन, केजीवीए, देवघर
कहते हैं प्रभारी डीइओ
विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि घंटा आधारित शिक्षकों को रखकर छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए. विद्यालय प्रबंध समिति भी खुद सक्षम है. इसके बावजूद हमेशा शिक्षकों की कमी शिक्षा व्यवस्था पर कुप्रभाव डालती है. बैठक कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
अशोक कुमार शर्मा, प्रभारी डीइओ, देवघर
जिले भर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में नामांकित हैं 452 छात्राएं
देवघर के प्रत्येक कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में इंटरमीडिएट प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में पठन-पाठन के लिए 50-50 सीटें निर्धारित हैं. आठ प्रखंडों में अवस्थित विद्यालयों में कुल आठ सौ सीटें है. चालू शैक्षणिक सत्र में इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष में 232 छात्राओं का दाखिला हुआ है. जबकि इंटरमीडिएट द्वितीय वर्ष में 220 छात्राएं अध्ययनरत हैं. वर्तमान में 348 सीटें खाली पड़ी हैं. इंटरमीडिएट प्रथम व द्वितीय वर्ष की छात्राओं को पढ़ाने के लिए विद्यालय में कोई शिक्षक नहीं है. नतीजा छात्राएं इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष में दाखिले से कतराती हैं. माता-पिता व अभिभावक भी शिक्षकों के नहीं रहने से हमेशा परेशान रहते हैं.

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