दो से अधिक बच्चों के मामले में बुरे फंसे चतरा के नगर परिषद अध्यक्ष, कोर्ट में याचिका मंजूर

Chatra News: चतरा नगर परिषद अध्यक्ष अताउर रहमान दो से अधिक बच्चों के आरोप में कानूनी संकट में हैं. सिविल कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया है. झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत उनकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे जिले की राजनीति गरमा गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

चतरा से दीनबंधू और मो तसलीम की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा में नगर परिषद अध्यक्ष पद को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है. नवनिर्वाचित अध्यक्ष अताउर रहमान उर्फ बाबू अब गंभीर आरोपों में घिर गए हैं. उनके खिलाफ दो से अधिक बच्चों की जानकारी छिपाकर चुनाव लड़ने का मामला कोर्ट तक पहुंच गया है. इस मामले में चतरा सिविल कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है. आने वाले दिनों में यह मामला स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है.

कोर्ट ने याचिका की स्वीकार, जल्द होगी सुनवाई

शुक्रवार को चतरा व्यवहार न्यायालय में इस मामले पर अहम सुनवाई हुई. झारखंड हाईकोर्ट से आए अधिवक्ता विनोद सिंह ने याचिकाकर्ता की ओर से मजबूत पैरवी की. उन्होंने न्यायालय के समक्ष कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को विस्तार से रखा. इसके बाद सिविल कोर्ट के सब जज ने मामले को संज्ञान में लेते हुए याचिका स्वीकार कर ली. अब इस पर नियमित सुनवाई शुरू होगी. याचिकाकर्ता राजेश कुमार उर्फ राजेश साह ने अदालत से स्पीडी ट्रायल की भी मांग की है.

क्या है पूरा मामला

यह पूरा विवाद नगर परिषद अध्यक्ष अताउर रहमान द्वारा दिए गए शपथ पत्र से जुड़ा है. आरोप है कि उन्होंने चुनाव के दौरान गलत जानकारी दी. शपथ पत्र में उन्होंने केवल दो बच्चों का जिक्र किया, जबकि उनके तीन बच्चों के होने का दावा किया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके बच्चों के नाम नर्गिस नाज, मो आसीर और मो जनाती नाज हैं. इनमें से कुछ बच्चों का जन्म 2013 के बाद हुआ है, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है.

क्या कहता है कानून

झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 18 के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार की तीसरी संतान का जन्म 9 फरवरी 2013 के बाद हुआ है, तो वह नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा. यही प्रावधान इस पूरे विवाद का केंद्र है. याचिकाकर्ता का कहना है कि अताउर रहमान ने इस नियम का उल्लंघन करते हुए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. यदि यह आरोप साबित होते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है.

कई वकीलों ने पेश की दलील

शुक्रवार को अदालत परिसर में इस मामले को लेकर काफी हलचल देखने को मिली. अधिवक्ता विनोद सिंह के साथ चतरा के कई वकीलों ने भी वादी पक्ष का सहयोग किया. इनमें कन्हैया कुमार, सतीश पांडेय, राजन संदीप और अमर कुमार शामिल हैं. सभी ने मिलकर इस मामले को मजबूती से अदालत के सामने रखा. दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है.

राजनीतिक माहौल हुआ गरम

इस मामले के सामने आने के बाद चतरा की राजनीति में उबाल आ गया है. विपक्षी खेमे ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है. वहीं, समर्थक इसे साजिश भी बता रहे हैं. अगर कोर्ट में आरोप साबित होते हैं, तो न सिर्फ अध्यक्ष पद खाली हो सकता है, बल्कि दोबारा चुनाव की स्थिति भी बन सकती है. इससे पूरे जिले की राजनीति प्रभावित हो सकती है.

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अदालती कार्यवाही पर टिकीं सबकी निगाहें

अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी है. कोर्ट इस मामले में सबूतों और दलीलों के आधार पर फैसला करेगा. यदि याचिकाकर्ता के आरोप सही साबित होते हैं, तो अताउर रहमान की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है. वहीं, अगर आरोप गलत साबित होते हैं, तो उन्हें बड़ी राहत मिल सकती है. फिलहाल, यह मामला चतरा में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुका है और आने वाले दिनों में इसका असर और बढ़ने की संभावना है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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