इटखोरी. प्रखंड के सौनिया मध्य विद्यालय का भवन पहले खंडहर में तब्दील हुआ, फिर मलबे के ढेर में बदल गया. भवन के अभाव में स्कूल को दूसरे गांव एरकी में शिफ्ट कर दिया गया है. छह साल पूर्व 2019 से सौनिया मध्य विद्यालय बगल के स्थित गांव एरकी प्राथमिक विद्यालय के दो कमरों में संचालित हो रहा है. मध्य विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है. स्कूल में कुल 162 बच्चे अध्यनरत हैं. कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थी एक ही कमरे में बैठने को विवश हैं. वहीं कक्षा छह से आठ के विद्यार्थी एक साथ बैठते हैं. बच्चों के अनुसार प्रत्येक बेंच पर चार-पांच विद्यार्थी बैठते हैं. इस स्कूल में पठन-पाठन की सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है. स्कूल के एक अन्य कमरे में कार्यालय, कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष, लाइब्रेरी व खेल सामग्री रखा हुआ है. नये भवन के निर्माण के लिए पंचायत समिति सदस्य पवन कुमार सिंह ने कई बार जिला अधिकारियों से मिलकर समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उनके अनुसार इसे लेकर ग्रामीण कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं. क्या कहते हैं स्कूल के बच्चे: स्कूल की छात्रा महक कुमारी ने कहा कि कमरे के अभाव में परेशानी होती है. एक बेंच पर कई बच्चों को बैठना पड़ता है. वहीं सोनाक्षी कुमारी ने कहा कि परेशानियों के बीच पढ़ाई करनी पड़ती है. कभी-कभी तो बाहर बरामदे में फर्श पर बैठना पड़ता है. यासमीन खातून ने कहा कि कमरा नहीं होने के कारण एक बेंच पर चार व पांच लोग बैठते हैं. माधवी कुमारी ने कहा कि बैठने में बहुत परेशानी होती है. वर्जन::: स्कूल की जर्जर स्थिति पर कई बार पत्राचार कर चुके हैं. अलावा प्रत्येक माह मासिक बैठक में भी भवन निर्माण पर ध्यान आकृष्ट कराता हूं. वरीय अधिकारियों को दर्जनों पत्र भेज चुका हूं. भवन की कमी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है. दो कमरे में पूरा स्कूल संचालित है. सतीश कुमार सिंह, प्रधानाध्यापक
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