प्रतिनिधि, चैनपुर
चैनपुर प्रखंड के पुंडरा पंचायत अंतर्गत गोपेरा गांव की स्थिति बरसात में किसी टापू से कम नहीं होती. गांव के दोनों ओर बहने वाली गोपेरा नदी और गोटिया नदी पर पुल नहीं होने से गांव की 300 आबादी हर साल बारिश के दिनों में आवागमन से पूरी तरह कट जाती है. ग्रामीणों को मात्र छह किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 15 किलोमीटर का चक्कर लगाकर सिकरी और नावाडीह डमौल होते हुए सफर करना पड़ता है. गांव में न तो पक्की सड़क है, न ही वाहन पहुंच पाते हैं. ग्रामीण केवल पगडंडियों के सहारे आवाजाही करते हैं.
पढ़ाई, इलाज और रोजगार पर असर
बरसात के मौसम में दोनों नदियों में बाढ़ जैसी स्थिति हो जाती है. ऐसे में स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और शिक्षा बाधित होती है. ग्रामीण मुख्यतः साग-सब्जी की खेती पर निर्भर हैं, लेकिन बाढ़ के कारण उपज बाजार तक नहीं पहुंच पाती, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. बीमार व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कई बार जान जोखिम में डालकर लोग नदी पार करते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.10 वर्षों से उठ रही मांग, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले दस वर्षों से सांसद, विधायक और प्रशासन से दोनों नदियों पर पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. ईश्वर प्रसाद ने कहा कि नदी में पुल नहीं होने से बरसात में गांव से दूसरे जगह पर जाने के लिए सोचना पड़ता है. सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि नदी में पुल नहीं रहने से लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्ते से आवागमन करते है. भेखलाल महतो ने कहा कि पुल नही होने से बरसात में सिमरिया साप्ताहिक हाट में साग सब्जी बेचने के लिए जाना भी बंद हो जाता है. ठाकुर महतो, गणेश महतो, रघु महतो ने कहा कि पुल के अभाव में बरसात के दिनों में जान जोखिम में डाल कर नदी पार करते है. जिससे हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. नागेश्वर महतो, कामेश्वर महतो, धनेश्वर महतो, करम महतो, कुलेश्वर महतो ने सांसद, विधायक से दोनो नदी पर पुल बनाने की मांग की है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
