सेना के जवान की इलाज के दौरान दिल्ली में मौत, चतरा में वीर सपूत को दी गई अंतिम विदाई

Chatra News: चतरा के खरीक गांव निवासी भारतीय सेना के जवान दीप नारायण सिंह का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया. शनिवार को पैतृक गांव पहुंचने पर हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी. सांसद कालीचरण सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित कर परिजनों को सांत्वना दी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

चतरा से दीनबंधू की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के सदर प्रखंड के अंतर्गत खरीक गांव निवासी भारतीय सेना के वीर जवान दीप नारायण सिंह का दिल्ली में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया. शनिवार को उनका पार्थिव शरीर जैसे ही पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. गांव के लोग अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में जुटे. हर आंख नम थी और माहौल गमगीन हो गया. लोगों ने देश सेवा में समर्पित जवान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई

दीप नारायण सिंह के अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग शामिल हुए. सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी. अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने जवान अमर रहे के नारे भी लगाए. परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक हर किसी ने जवान के निधन को बड़ी क्षति बताया. लोगों ने कहा कि दीप नारायण सिंह हमेशा गांव और देश के लिए गर्व का विषय रहेंगे.

सांसद कालीचरण सिंह ने जताया शोक

चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह भी जवान के पैतृक निवास पहुंचे. उन्होंने दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिजनों से मिलकर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं. सांसद ने कहा कि देश सेवा में समर्पित जवान का इस तरह असमय चले जाना समाज और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की.

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देश सेवा के लिए हमेशा याद किए जाएंगे दीप नारायण सिंह

ग्रामीणों ने कहा कि दीप नारायण सिंह ने देश की सेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य माना. उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा. गांव के लोगों ने कहा कि उनका बलिदान और सेवा भावना हमेशा याद रखी जाएगी.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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