झींकपानी: टोंटो प्रखंड के नीमडीह पंचायत अंतर्गत चालगी गांव में मंगलवार की शाम एक दर्दनाक हादसा सामने आया. फसल की रखवाली कर रहे एक युवा किसान पर जंगली हाथी ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं.
टार्च की रोशनी पड़ते ही काल बनकर टूटे गजराज
बीते मंगलवार की शाम करीब 6.30 बजे किसान गुड्डू गोप (28) अन्य ग्रामीणों के साथ अपने खेतों में तैयार हो रही फसल की रखवाली कर रहा था. क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से हाथियों का आतंक लगातार जारी है. घटना के वक्त जैसे ही किसानों ने खेत के पास हलचल देख टार्च जलाई, रोशनी पड़ते ही दो जंगली हाथी अचानक वहां आ धमके. जब तक किसान संभल पाते, उनमें से एक आक्रामक हाथी ने गुड्डू को अपनी सूंड़ में लपेटकर जमीन पर पटक दिया और पैर से ठोकर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया.
ग्रामीणों के अदम्य साहस से बची जान
हाथी के अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गयी. साथी किसानों और पहरेदारी कर रहे ग्रामीणों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए लाठी-डंडों के साथ जोरदार शोर मचाना शुरू कर दिया. ग्रामीणों के भारी शोर के कारण हाथी घबरा गया, जिससे उसने किसान को और अधिक कुचलने के बजाय वहां से हटना ही बेहतर समझा. इस तरह ग्रामीणों के एकजुट प्रयास से गुड्डू की जान बाल-बाल बच गयी.
कमर और पैरों में आई गंभीर चोटें
हाथी के हमले में बुरी तरह जख्मी हुए गुड्डू गोप को तुरंत सदर अस्पताल, चाईबासा पहुंचाया गया. चिकित्सकों के अनुसार, हाथी के पटकने और ठोकर मारने से किसान के कमर और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
टोंटो प्रखंड के कई गांवों में मंडरा रहा मौत का साया
यह कोई पहली घटना नहीं है. टोंटो प्रखंड के चालगी, हेस्सा सुरनिया, सुंडी सुरुनिया, राजंका और दोकट्टा जैसे इलाके पहले से ही गंभीर हाथी प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं. चालगी व आसपास के गांवों में इन दिनों रात के समय जंगली हाथी खेतों में लहलहाती और तैयार फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं.
अपनी जान की हिफाजत के लिए ग्रामीण युवा पूरी-पूरी रात जागकर कड़ाके की ठंड और डर के साये में पहरेदारी करने को मजबूर हैं. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने चालगी गांव पहुंचकर ग्रामीणों के सहयोग से हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ दिया है, लेकिन इलाके के लोगों में डर अब भी कायम है.
