सारंडा के किसानों के लिए वरदान बना सरकारी ट्रैक्टर, यहां जानें कैसे एक महिने में हुआ 62 हजार का कारोबार...

झारखंड के सारंडा में एफपीसी ने सरकारी ट्रैक्टर का उपयोग कर कस्टम हायरिंग सेंटर से एक महीने में 62 हजार रुपये की कमाई की है. जानें कैसे किसान बन रहे आत्मनिर्भर.

चाईबासा: झारखंड के सारंडा क्षेत्र के किसानों के लिए सरकारी योजनाएं किस तरह उनकी तकदीर बदल रही हैं, इसकी एक बेहतरीन मिसाल सामने आई है. भूमि संरक्षण विभाग की मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना के तहत सारंडा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) को मिला ट्रैक्टर अब किसानों के लिए केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि कमाई और आत्मनिर्भरता का नया जरिया बन गया है.

इस ट्रैक्टर को 'कस्टम हायरिंग सेंटर' से जोड़कर एफपीसी ने महज एक महीने के भीतर 62 हजार रुपये का शानदार कारोबार कर दिखाया है.

कैसे बदली तस्वीर?

सारंडा एफपीसी ने समझदारी दिखाते हुए इस ट्रैक्टर को केवल अपने सदस्यों तक सीमित नहीं रखा. इसे कस्टम हायरिंग सेंटर के रूप में तब्दील कर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी खोल दिया गया.

  • कृषि सेवाएं: भूमि की तैयारी (जुताई) से लेकर कृषि कार्यों के लिए परिवहन जैसी सेवाएं अब स्थानीय किसानों को आसानी से मिल रही हैं.

राहत: इससे किसानों को समय पर कृषि मशीनरी तो मिल ही रही है, साथ ही बाहर से महंगे किराये पर ट्रैक्टर या अन्य संसाधन लेने की मजबूरी से भी बड़ी राहत मिली है.

सामुदायिक परिसंपत्ति बन मिसाल पेश की

सारंडा एफपीसी ने सरकारी संसाधन का सदुपयोग करते हुए इसे एक सामुदायिक परिसंपत्ति में बदल दिया है. अब यह ट्रैक्टर एफपीसी के लिए महज लोहे का टुकड़ा या मशीन नहीं, बल्कि आय का एक स्थायी जरिया बन चुका है. सामूहिक स्तर पर इसके इस्तेमाल से किसानों के सभी कृषि कार्य तय समय पर पूरे हो रहे हैं.

क्या कहते हैं उपायुक्त?

"सरकारी योजनाओं का मूल उद्देश्य जरूरतमंदों और समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. सारंडा एफपीसी ने ट्रैक्टर का कस्टम हायरिंग सेंटर के रूप में बेहतरीन उपयोग कर कम समय में जो आय अर्जित की है, वह वाकई काबिले तारीफ है. यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य किसान समूहों के लिए भी बड़ी प्रेरणा है. जिला प्रशासन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में हरसंभव सहयोग करता रहेगा."मनीष कुमार, उपायुक्त

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By Anil Ranjan

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