चाईबासा.
चाईबासा के आमला टोला स्थित श्री रानी सती जी मंदिर में मंगसीर नवमी महोत्सव चल रहा है. इसके पांचवें दिन सोमवार की सुबह 08 बजे से पूजन ज्योत आरती हुई. वहीं, अपराह्न 3 बजे से पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) की ज्योति खेमका ने मंगल पाठ किया. मां के कर्णप्रिय भजन गाया. मंगल पाठ सेवा दादी परिवार, प्रसाद सेवा बिनोद नेवटिया, शृंगार सेवा राजकुमार ओझा व मंगल भोग सेवा सुरेश पोद्दार ने किया. वहीं, संध्या आरती के पश्चात भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया.श्री रानी सती मंदिर ट्रस्ट के सचिव प्रदीप पसारी ने बताया कि मंगल पाठ में मां के नारायणी स्वरूप के विवाह का वर्णन हुआ. इसमें त्रेता युग के महाभारत काल में अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा का अवतरण कलियुग में नारायणी स्वरूप में हुआ. तनधन स्वरूप में अभिमन्यु का अवतरण हुआ. नारायणी का विवाह तनधन जी के साथ हुआ. युद्ध में महाभारत के तर्ज पर चक्रव्यूह में तनधनजी का निर्वाण होने पर नारायणी को भगवान कृष्ण ने आशीर्वाद दिया. नारायणी देवी ने सतीत्व को प्राप्त किया. श्री रानी सतीजी के नाम से जगत में उनकी पूजा हुई. उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष प्रमाण है कि शत्रु प्रकोप से मां सदैव रक्षा करती हैं. इस दौरान चुनरी ओढ़ लगभग 300 महिलाओं व बालिकाओं ने मंगल पाठ किया. बताया गया कि मंगल पाठ का श्रवण से मां जगदंबा सुख शांति प्रदान करती हैं. वहीं, ट्रस्टी प्रभात पसारी ने भक्तों से आगामी तीन दिवस सप्तमी, अष्टमी और नवमी के मंगल पाठ सहित सभी कार्यक्रम में भाग लेकर व दर्शन लाभ लेकर पुण्य के सहभागी बनने का अनुरोध किया. कार्यक्रम संयोजक मंडली में प्रभात पसारी, कन्हैया अग्रवाल, राकेश बुधिया,अभिषेक पसारी, अनूप जोशी, कपिल गोयल, अजय मोहता, सुशील पसारी, नारायण पाडिया,अंचल पसारी, जानी सराफ, बजरंग अग्रवाल, अमित रुंगटा, मधु बुधिया, स्वेता जालान, डिम्पल अग्रवाल, कृतिका पसारी मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
