जैंत गढ़: एक ओर बरसात में बीमारी का खौफ,डायरिया ,मलेरिया और टायफायड प्रभावित क्षेत्र उसपर महीने भर से लाल पानी की आपूर्ति से अब उपभोक्ता लाल पीले होने लगे है.बार बार ऑपरेटर को हिदायत देने,विभाग से संपर्क करने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आई है.
जैंत गढ़ आस पास की दस हजार की आबादी विगत एक माह से लाल पानी पीने को बाध्य है.जैंत गढ़ ग्रामीण जलापूर्ति केंद्र से महीना भर से बिना फिल्टर किए मटमैला लाल पानी आपूर्ति की जा रही है.
इन दिनों आस पास तीन पंचायत के दो दर्जन से अधिक गावों की दस हजार से अधिक लोग प्रभावित है.विदित हो कि दो दर्जन गांवों के लोग पेय जल के लिए पूरी तरह जैंत गढ़ ग्रामीण जलापूर्ति केंद्र पर आश्रित है जैंत गढ़ आस पास क्षेत्र के चंपा कल,और कुंए का पानी खरा है.ये पीने योग्य नहीं है.मजबूत होकर लोग इसी गंदे पानी पीने को बाध्य है. एक ओर जहां क्षेत्र में जल जनित रोग टाइफाइड,डायरिया, कॉलरा आदि का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है.वही दूषित पानी इन बीमारियों को दावत दे रही है. भाजपा के जुझारू नेता सत्यपाल बेहरा ने कहा इसी नदी का पानी पड़ोसी राज्य उड़ीसा के चंपुआ शहर में भी सप्लाई की जाती है.जैंत गढ़ और चंपुआ के इंटेक्ट वेल की दूरी 100 मीटर भी नहीं है.पर पानी में आसमान जमीन का अंतर है.चंपुआ में पानी मिनरल वाटर की तरह साफ सुथरी आपूर्ति की जा रही है तो जैंत गढ़ में लाल पानी कीचड़ युक्त आपूर्ति की जा रही है.ये सरकार और विभाग की विफलता है.जनता इसके लिए आंदोलन करेगी.
समाज सेवी अमीर हिन्दुस्तानी ने कहा उपभोक्ता लाल पानी का पैसा देते है क्या.विभाग पानी के नाम पर बीमारी परोस रही है.अब जन आंदोलन होगा.
समाज सेवी रवि पोद्दार ने कहा पानी साफ करने में बहुत खर्च नहीं है.विभाग फिल्टर किट साफ करा दे.साफ बालू लूम्स और फिटकरी की व्यवस्था कर दे तो समस्या का समाधान हो जाएगा.पर विभाग उतना भी करने को तैयार नहीं है.
क्या है मामला..जैंत गढ़ जलापूर्ति केंद्र का संचालन ग्रामीण जल एवं स्वक्षता समिति करती है.उपभोक्ताओं से शुल्क वसूल कर इसका संचालन करना है.छोटे मोटे खर्च तो सेवा शुल्क से मैनेज हो जाता है.पर बड़े खर्च के लिए विभाग की ओर देखना पड़ता है.
इस संदर्भ में ऑपरेटर मो गाजी ने कहा फिल्टर किट फटा है.न ब्लीचिंग है न केमिकल न लूम्स है.तो पानी कैसे साफ होगा.मजबूरी में बिना फिल्टर के पानी चलाना पड़ रहा है.
प्रोजेक्ट के पूर्व ऑपरेटर मोजीब आलम ने कहा जिस एजेंसी ने निर्माण किया है उसे पूरे प्रोजेक्ट को अपडेट कर के समिति को हैंड ओवर करना था.पर टर्न पूरा होने के बाद एजेंसी ने जर्जर हालत में समिति को सुपुर्द कर फरार हो गई.परियोजना पर विभाग की लापरवाही जग जाहिर है. इस परियोजना को पेय जल एवं स्वक्षता विभाग ने राम भरोसे छोड़ दिया है.
