Chaibasa News : स्कूल में बिना सामग्री सप्लाई के भुगतान, एचएम के निजी खाते में डाले गये रुपये

पश्चिमी सिंहभूम जिले के पीएम श्री विद्यालयों में सामग्रियों की खरीद एवं भुगतान प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है.

चाईबासा.

पश्चिमी सिंहभूम जिले के पीएम श्री विद्यालयों में सामग्रियों की खरीद एवं भुगतान प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है. उपायुक्त चंदन कुमार द्वारा करायी गयी जांच में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है. अपर उपायुक्त प्रवीण केरकेट्टा की अगुवाई में हुई जांच में पाया गया कि स्कूलों में न तो नियमानुसार क्रय समिति का गठन किया गया और न ही भारत सरकार के जनरल फाइनेंशियल रूल्स (जीएफआर) 2017 का पालन किया गया.

सामग्री खरीद में मनमानी नियमों की अनदेखी

जांच रिपोर्ट के अनुसार, सामग्रियों की खरीदारी में न तो एल-1 (न्यूनतम दर वाले संवेदक) का सही निर्धारण किया गया और न ही चयन की प्रक्रिया पारदर्शी रही. कई मामलों में मनपसंद संवेदकों को कार्यादेश के बिना ही भुगतान कर दिया गया. इतना ही नहीं, कई स्कूलों में विपत्रों (बिलों) का भुगतान विद्यालय प्रबंधन समिति के सक्षम पदाधिकारियों के हस्ताक्षर के बिना ही कर दिया गया और कुछ मामलों में तो आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान न कर प्रधानाध्यापकों के व्यक्तिगत खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिये गये. फिलहाल अपर उपायुक्त प्रवीण केरकेट्टा ने जांच रिपोर्ट को गोपनीय शाखा को सौंप दिया है. उपायुक्त चंदन कुमार ने पीएम श्री योजना के जिला समन्वयक, लेखापाल, लेखा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उनके विरुद्ध झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.

जमीनी हकीकत : सामग्री अधूरी, स्टॉक रजिस्टर गायब

जांच टीम ने निरीक्षण में पाया कि सामग्रियों की आपूर्ति निरीक्षण तिथि तक अधूरी थी. अधिकतर स्कूलों में भंडार पंजी (स्टॉक रजिस्टर) तक संधारित नहीं किया गया था. इसके अलावा, लाखों की लागत से प्रस्तावित गतिविधियों जैसे छात्रों के एक्सपोजर विजिट के नाम पर केवल बस का भाड़ा, ईंधन और भोजन की राशि के बिल बनाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि वास्तविक गतिविधि करायी ही नहीं गयी.

मुख्य बैठक में मिली थी साजिश के संकेत

जांच में यह भी सामने आया कि 19 मार्च 2025 को हुई जिला स्तरीय बैठक में प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाया गया कि वे विभाग द्वारा चयनित संवेदकों के बिलों पर हस्ताक्षर कर उन्हें शीघ्रता से जमा करें, अन्यथा यदि आवंटन की राशि वापस होती है तो कार्रवाई की जायेगी.

किचन गार्डन और सेल्फी प्वाइंट योजनाएं भी बनी भ्रष्टाचार का शिकार

विद्यालयों में किचन गार्डन योजना के तहत 2000 रुपए प्रति स्कूल की राशि 28 मार्च को ट्रांसफर की गयी थी, लेकिन मई तक निरीक्षण में जमीन पर कोई कार्य नहीं दिखा. वहीं पीएम श्री सेल्फी प्वाइंट के लिए स्वीकृत 25,000 रुपये में से अधिकतर राशि की निकासी कर ली गयी, जबकि जमीन पर 5000 रुपये से भी कम का काम हुआ.

मामले की जांच की गयी है. जांच की रिपोर्ट गोपनीय शाखा में सौंप दी गयी है.

-प्रवीण केरकेट्टा, अपर उपायुक्त

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Author: AKASH

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